ऊर्जा निगम में चहेते अभियंता को पदोन्नति देने के लिए कुछ अफसरों ने कागजों में हेराफेरी कर दी। इसके लिए चहेते अभियंता की पिछली पदोन्नति करीब साल भर पहले दर्शाई गई।
पदोन्नति के दो आदेशों से गड़बड़ी
मामला सामने आने के बाद लेखा अनुभाग ने प्रबंधन से इस अभियंता की पदोन्नति वर्ष स्पष्ट करने का अनुरोध किया है। ऊर्जा निगम में सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता पर पदोन्नति प्रकरण में नया विवाद सामने आया है। एक अवर अभियंता के सहायक अभियंता पद पर पदोन्नति के दो आदेशों से गड़बड़ी सामने आई है।
कुछ दस्तावेजों में आरोपी अभियंता की सहायक अभियंता पद पर वर्ष 2009 में पदोन्नति दिखाई गई है। जबकि बीते साल सहायक से अधिशासी अभियंता पर पदोन्नति की वरिष्ठता सूची में उसे सहायक अभियंता के लिए पदोन्नति वर्ष 2008 दर्शाया है।
बताया जा रहा है कि अधिशासी अभियंता पर पदोन्नति के लिए यह खेल किया गया है। दरअसल पदोन्नति पाने वालों में अधिकतर वर्ष 2008 के सहायक अभियंता हैं। अब इस अभियंता के सहायक अभियंता पर पदोन्नति वर्ष 2008 के अन्य दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए।
दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2008 में इस अभियंता ने बोनस आदि का लाभ भी लिया है, जो अवर अभियंता से ऊपर का अफसर नहीं पा सकता है। इससे साफ होता है कि वर्ष 2008 में वह अवर अभियंता ही था।
‘सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता पर पदोन्नति प्रक्रिया में अनियमितता हुई है। जो योग्य हैं, उनसे अन्याय नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ कुछ अभियंता उच्च न्यायालय भी जा रहे हैं।’
- जीएन कोठियाल, केंद्रीय अध्यक्ष उत्तराखंड जूनियर इंजीनियर पावर एसोसिएशन
‘पत्रावलियों का अवलोकन हो रहा है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। अगर ऐसा हुआ है, तो जांच कराई जाएगी।’
-मधुसूदन, प्रवक्ता, ऊर्जा निगम