पॉवर कारपोरेशन में बिना नियमावली के ही कई साल पहले वरिष्ठ विधि अधिकारी और विधि अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई। हद तो यह हुई कि नियुक्ति से पहले और नियुक्ति के बाद भी शासन से इसकी कोई अनुमति नहीं ली गई।
यह तब है जबकि प्रदेश में कई विभाग नियमावली न बन पाने के कारण संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों को नियमित तक नहीं कर पा रहे हैं।
आरटीआई में हुआ खुलासा
उत्तराखंड पॉवर कॉरपोरेशन का यह हाल सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सामने आया। दून, शांति विहार निवासी शक्ति सिंह ने आरटीआई के तहत पॉवर कॉरपोरेशन से वरिष्ठ विधि अधिकारी की भरती नियमावली की मांग की थी।
पहले तो निगम ने इसे व्यक्तिगत बताते हुए सूचना देने से ही इंकार कर दिया। कहीं से सूचना नहीं मिली तो यह मामला राज्य सूचना आयोग तक जा पहुंचा। राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने निगम को सूचना देने को आदेश दिया तो मामले की परत खुली।
नियुक्ति की नहीं है नियमावली
पॉवर कॉरपोरेशन ने स्वीकार किया कि वरिष्ठ विधि अधिकारी और विधि अधिकारी की नियुक्ति की कोई नियमावली है ही नहीं। केवल इंटरव्यू के आधार पर अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
हद तो यह रही कि कॉरपोरेशन ने नियुक्ति से पहले और बाद में भी शासन से अनुमति लेना तक मुनासिब नहीं समझा। आयुक्त ने इस मामले में नाराजगी जताते हुए यह तक कहा कि यह एक ही प्रदेश में दोहरा भेदभाव है।
एक तरफ तो हाल यह है कि प्रदेश में कई विभागों में नियमावली न होने के कारण संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों तक को नियुक्त नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर कारपोरेशन में बिना नियमावली के ही नियुक्ति कर दी जा रही है।