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International Youth Day 2020: प्रवासियों के खेवनहार बने गिरीश, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके सम्मानित

Wed, 12 Aug 2020 01:26 PM IST
अलका त्यागी चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर

सार

  • छह सालों में दुबई में फंसे 1500 लोगों की करा चुके वतन वापसी
  • कोरोना काल में भी 250 लोगों को घर वापसी कराई 
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गिरीश - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सात समुंदर पार 12 साल पहले दुबई नौकरी करने गए उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के गिरीश प्रवासियों के लिए खेवनहार बने हुए हैं। अपनी मेहनत के बूते बेहतर कॅरिअर बनाने के बाद गिरीश ने दुबई में अच्छी नौकरी के झांसे में फंसे या अन्य वजहों से परेशान करीब डेढ़ हजार प्रवासियों को उनके घर भिजवाने का काम किया।

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कोरोना काल में भी उन्होंने यूएई और भारत सरकार के बीच सेतु का काम करते हुए इमरजेंसी मामलों में फंसे करीब दो सौ लोगों को भारत भेजने की व्यवस्था की थी। ऐसे ही कार्यों की वजह से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गिरीश को वाराणसी में प्रवासी भारतीय अवॉर्ड से सम्मानित कर चुके हैं।

मूल रूप से बेड़ीनाग पिथौरागढ़ के रहने वाले गिरीश पंत का परिवार दिल्ली के सादतपुर में रहता है। बेड़ीनाग में उनके चाचा और अन्य परिजन रहते हैं। गिरीश वर्ष 2008 में नौकरी के सिलसिले में दुबई चले गए थे।
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वर्तमान में वे कंस्ट्रक्शन कंपनी वीवर गल्फ में सीएसआर डायरेक्टर हैं। दुबई से फोन पर हुई बातचीत में गिरीश ने बताया कि यूएअई में करीब 35 लाख भारतीय हैं। नौकरी के झांसे, मानव तस्करी, समुद्री जहाज और अन्य गतिविधियों में काफी लोग फंस जाते हैं।

साल 2014 में उन्होंने ऐसे लोगों को उनके घर वापस भेजने के लिए मदद करनी शुरू की थी। केवल भारत ही नहीं बल्कि ईरान, बहरीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, फिलीपींस, रुस, श्रीलंका सहित अन्य देशों में प्रवासियों को घर भेजने का काम किया।

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छह सालों में वे करीब 1500 प्रवासियों को उनके घर भेजने में मदद कर चुके हैं। उन्होंने मदद के बदले आज तक किसी भी व्यक्ति से पैसा नहीं लिया है। कोरोना काल में फंसे ढाई सौ लोगों की आबूधाबी में मंदिर निर्माण में लोगों और काउस्लेट के साथ मिलकर रहने, खाने की व्यवस्था की है और उनको घर भेजने की व्यवस्था कराई थी।

खून में है सेवाभाव, गांव से लगाव
गिरीश कहते हैं कि उनके दादा स्व. लक्ष्मी दत्त पंत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनके पिता नंदा बल्लभ पंत सरस्वती शिशु मंदिर में आचार्य रह चुके हैं और दिल्ली में सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। उनके खून में सेवाभाव है। पहाड़ से बेहद लगाव रखने वाले गिरीश हर साल अपने गांव जरूर जाते हैं। 

कई सम्मान से नवाजे गए हैं गिरीश
गिरीश पंत को प्रवासियों के लिए बेहतर कार्य के लिए कईं देशों से सम्मान मिल चुका है। श्रीलंका के राष्ट्रपति के हाथों वर्ल्ड आइकॉन पुरस्कार मिल चुका है जबकि यूएसए सरकार की ओर से इंटरनेशनल यूथ लीडर अवॉर्ड दिया जा चुका है। गिरीश का कहना है कि उनकी उम्र 41 साल है। उत्तराखंड और दिल्ली के वे पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें सबसे कम उम्र में उन्हें राष्ट्रपति के हाथों प्रवासी भारतीय अवॉर्ड मिला है। कोरोना कॉल में उन्होंने यूएई में 300 से ज्यादा लोगों का दाह संस्कार कराया है।
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