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देहरादून: देश के पहले लेखक गांव में अंतरराष्ट्रीय महोत्सव शुरू, 60 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे

Sun, 25 Oct 2026 03:48 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून

सार

लेखक गांव साहित्य, संस्कृति, कला और प्रकृति के माध्यम से दुनिया के सृजनशील लोगों को एक मंच पर लाने का अभियान है।
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लेखक गांव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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देश के पहले लेखक गांव में आज से अंतरराष्ट्रीय महोत्सव शुरू हो गया है। महोत्सव का शुभारंभ राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया। अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला को समर्पित इस महोत्सव में 60 देशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, कवियों, शिक्षाविदों, चिंतकों, कलाकारों तथा विद्यार्थियों ने सहभागिता की। उद्घाटन समारोह में साहित्य की सामाजिक भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, सांस्कृतिक चेतना और विश्वबंधुत्व को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

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राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लेखक गांव की परिकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार करने की दिशा में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का प्रयास सराहनीय है। उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ वीरता, साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि जिस लेखनी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय चेतना जगाई, वही आज राष्ट्र के चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता जगाएं, राष्ट्रीय कर्तव्यबोध को प्रबल करें और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ें। शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कामना की कि साहित्यकारों की लेखनी से समाज में ज्ञान, सद्भाव और सकारात्मकता का अमृत प्रवाहित हो।
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शांति, संस्कृति और सद्भाव का वैश्विक मंच बनेगा लेखक गांव
उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जब दुनिया के अनेक हिस्से युद्ध और अशांति से प्रभावित हैं, तब हिमालय की गोद में स्थित लेखक गाँव शांति, संस्कृति और मानवीय सद्भाव का संदेश दे रहा है। उन्होंने कहा कि जिस श्रद्धा से लोग भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए उत्तराखंड आते हैं, उसी भावना से उन्हें लेखक गाँव में साहित्य, चिंतन और साधना के लिए भी आना चाहिए। उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी जैसी लोकभाषाओं को इस वैश्विक मंच पर उचित स्थान देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और भाषाई विरासत को देश-दुनिया में व्यापक पहचान मिल सके। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने लेखक गांव को साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत केंद्र बताते हुए कहा कि यह युवाओं के लिए सृजन और रचनात्मक संभावनाओं का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन विभिन्न देशों के साहित्यकारों और संस्कृतियों के बीच संवाद, सहयोग और मैत्री को प्रगाढ़ करेंगे। रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि लेखक गांव ज्ञान और सृजन का ऐसा केंद्र बनेगा, जिसकी ज्योति पूरे विश्व को आलोकित करेगी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि सत्ताएं आती-जाती रहेंगी, लेकिन राष्ट्र की आत्मा को सुरक्षित रखने के लिए ज्ञान और लेखकों का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने लेखक गांव की परिकल्पना की सराहना करते हुए इसे अटल बिहारी वाजपेयी के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

साहित्यिक सृजन और पुस्तकों की पहुंच से तय होगी सफलता
प्रसिद्ध प्रवासी कथाकार तेजेन्द्र शर्मा ने लेखक गांव की तीन वर्षों की यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी साहित्यिक केंद्र की वास्तविक सफलता वहां होने वाले सृजन और पाठकों तक पहुंचने वाली पुस्तकों से निर्धारित होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लेखक गाँव ऐसा सृजनधाम बनेगा, जहां रची गई साहित्यिक कृतियां व्यापक पाठक समुदाय तक पहुंचेंगी और भारतीय साहित्य को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प
महोत्सव के अध्यक्षीय उद्बोधन में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने राज्यपाल सहित सभी अतिथियों, संत-महात्माओं, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों और देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन के साथ संसद में बिताए समय को याद करते हुए उनके सामाजिक सरोकारों, जनसेवा के प्रति समर्पण और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का उल्लेख किया। डॉ. निशंक ने कहा कि लेखक गांव केवल एक परिसर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्यिक सृजन और सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने का संकल्प है। हिमालय की यह पावन भूमि सदियों से ऋषियों, मनीषियों और साधकों की तपस्थली रही है। लेखक गाँव इसी गौरवशाली परंपरा को समकालीन संदर्भों में आगे बढ़ाने का प्रयास है, जहां साहित्य, संस्कृति, कला और ज्ञान के विविध आयामों का संगम हो सके।
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