विश्व दिव्यांग दिवस के उपलक्ष्य में एक ओर दिव्यांगों के आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए कैंप लगाया गया है, वहीं दूसरी ओर दिव्यांगों से जुड़ी एक भी मांग पिछले कई सालों में पूरी नहीं की गई। विभागों में नौकरी में न तो इन्हें तीन प्रतिशत आरक्षण मिल पाया और न ही सीएम की कोई घोषणा इनके लिए लागू हो पाई। ऐसे में दिव्यांग खुद को समाज से कटा हुआ मानने लगे हैं।
विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांगों के लिए घोषणाएं तो की जाती है लेकिन वह पूरी नहीं हो पाती। इतना ही नहीं केंद्र से शासनादेश पारित होने के बावजूद वह कभी अमल में नहीं लाया गया, जिसके अनुसार दिव्यांगों को हर विभाग में नौकरी में तीन प्रतिशत आरक्षण दिया जाना था। जिसका फायदा राज्य के दिव्यांगों को अब तक नहीं मिल पाया है।
सीएम की घोषणा के बावजूद नगर निगम की ओर से फड़ लगाने के लिए दिव्यांगों को जगह नहीं दी गई है। इतना ही नहीं सीएम की ओर से पिछले साल दिव्यांग दिवस पर यह घोषणा की गई थी कि परिवहन विभाग की ओर से स्वरोजगार योजना के तहत थ्री व्हिलर, ऑटो, सिटी बस, मैजिक के लिए दिए जाने वाले परमिट में तीन प्रतिशत कोटा दिव्यांगों को दिया जाएगा। लेकिन यह घोषणा भी पूरी नहीं हो पाई।
नहीं मिलती पेंशन तक समय से
राज्य के एक लाख 68 हजार दिव्यांगों को समाज कल्याण विभाग की ओर से पेंशन दी जाती है, लेकिन स्थिति यह है कि पिछले 6 महीने से वह भी नहीं मिल पाई है। इसको लेकर दिव्यांग आंदोलन की घोषणा भी कर चुके हैं। अधिकतर यह पेंशन समय से नहीं बंट पाती है। इससे दिव्यांगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है।
विश्व दिव्यांग दिवस पर वाहवाही लूटने को सरकार की ओर से घोषणाएं कर दी जाती है। पर उन पर अमल नहीं होता। ऐसे विश्व दिव्यांग दिवस मनाने का क्या फायदा जब हम लोगों को न नौकरी में आरक्षण मिलना है, न ही किसी स्वरोजगार से जोड़ा जाना है। पेंशन को भी विभाग कभी दे देता है तो कभी नहीं।
- बसंत कुमार थपलियाल, प्रदेश अध्यक्ष, नंदा देवी निर्धन दिव्यांग कल्याण एसोसिएशन