एक-दो या कभी तीन से चार तस्करों को स्मैक, चरस, डोढ़ा, भांग आदि नशीले पदार्थों के साथ दबोचा जाता है। ये सभी देहरादून, सहारनपुर, हरिद्वार, बिजनौर आदि आस-पड़ोस के जनपदों के रहने वाले बताए जाते हैं। इन्हीं गुडवर्क के सहारे पुलिस अपनी पीठ थपथपाने में पीछे नहीं रहती। मगर इस बीच एक बात सभी खटकती है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर दून में नशा कौन सप्लाई करता है? दरअसल, इस प्रश्न को भी पुलिस की अपनी कार्यप्रणाली ही जन्म देती है।
कारण साफ है कि आज तक पुलिस ने इस धंधे की ऐसी किसी बड़ी मछली पर हाथ नहीं डाला है जिसके सहारे नशे के इस गठजोड़ का भांडा फोड़ हो सके। अलबत्ता ‘टूटे-फूटे’ नाम जरूर सामने आते हैं। इन्हीं में से एक है बरेली का खान। चरस और स्मैक के मामलों में पुलिस का दावा होता है कि पूछताछ में आरोपियों ने बरेली के किसी खान नाम बताया है। जबकि, भांग, डोढा आदि के मामले में हिमाचल के इसी तरह के एक पात्र का नाम सामने आता है।
ये हुई कार्रवाईयां
साल 2017
चरस-88 किलोग्राम
स्मैक-4.76 किलोग्राम
अफीम-11 किलोग्राम
गांजा-70 किलोग्राम
डोडा-123 किलोग्राम
नशीली गोलियां-17000(लगभग)
इंजेक्शन-20500
कुल आरोपी-561
साल 2018
चरस-45 किलोग्राम
स्मैक-1.40 किलोग्राम
अफीम-700 ग्राम
गांजा-30 किलोग्राम
डोडा-55 किलोग्राम
कुल आरोपी-302
(साल 2018 की कार्रवाई 15 जून तक की हैं)
पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पहले एकाध बरेली से भी पकड़े गए हैं। अब बड़े सौदागरों पर भी फोकस किया जा रहा है। नशे के विरुद्ध अभियान को अब नई रूपरेखा देकर फिर से शुरू किया जाएगा।
पुष्पक ज्योति, डीआईजी गढ़वाल रेंज