ज्यादातर डील जमीन और जेवरात गिरवी या बेचकर की गई
इन्हें किसी सूदखोर के पास गिरवी नहीं रखा गया। बल्कि नौकरी के इन सौदागरों ने ही अपने पास रखकर अभ्यर्थियों को नौकरी दिलवाई। विजिलेंस जांच में पता चला है कि दरोगा बनने के दो से तीन साल के भीतर ही इन जेवर और जमीनों को पैसे देकर छुड़वा लिया गया। कुछ अभ्यर्थियों ने तो इन आरोपियों को जमीनें और दुकानें बेच भी डालीं। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार इसका खुलासा आरोपियों की संपत्तियों की जांच में भी हुआ है। इस मामले में अभी तक यह बात सामने नहीं आई है कि इस नौकरी का रेट क्या था। मसलन किसी से नकद लिए गए तो कितने रुपये लिए गए? बताया जा रहा है कि ज्यादातर डील इसी तरह जमीन और जेवरात गिरवी या बेचकर की गई हैं।
जेल में बंद आरोपियों को भी बेची और गिरवी रखी गई जमीनें
इस मामले में 10 मुख्य आरोपी जेल में बंद हैं। इन सभी की संपत्तियों की जांच भी चल रही है। कुछ संपत्तियों की एसटीएफ ने जिला प्रशासन की मदद से जांच की है तो बाकी की विजिलेंस की ओर से की जा रही है। बताया जा रहा है कि बहुत से अभ्यर्थियों ने जेल में बंद इन आरोपियों को भी जमीनें बेची और उनके पास गिरवी रखी थीं। इनके दस्तावेज भी विजिलेंस को मिले हैं।
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100 से अधिक हो सकती है दरोगाओं की संख्या
बीते दिनों निलंबित किए गए दरोगाओं की जनपदों की पुलिस ने विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। धांधली में सामने आने वाली दरोगाओं की संख्या बढ़ भी सकती है। शुरुआत में इनकी संख्या तकरीबन 30 से 35 मानी जा रही थी। लेकिन, जांच में सामने आया है कि इनकी संख्या 100 से भी अधिक हो सकती है। ऐसे में जल्द ही पुलिस विभाग कुछ और दरोगाओं पर कार्रवाई कर सकता है।