पर्यटन सीजन के शुरू होते ही दो पर्यटन नगरों टिहरी और नैनीताल में विभागीय लापरवाहियों पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने दोनों प्रकरणों की जांच का आदेश दिया है। पहला मामला टिहरी झील में करोड़ों की ‘मरीना’ रेस्तरां बोट के डूबने का है, जबकि दूसरा प्रकरण पर्यटन नगरी नैनीताल में पेयजल लाइनों का बार बार फटना है।
कैसे डूबी ‘मरीना’ रेस्तरां बोट?
टिहरी झील में करोड़ों की लागत से तैयार किए गए ‘मरीना’ रेस्तरां बोट का एक हिस्सा डूब गया है। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कड़ा रुख दिखाया है। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी और प्रबंध निदेशक जीएमवीएन को जांच के आदेश दिए हैं। बताते चले कि रखरखाव के अभाव में मंगलवार को बोट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया, जिससे बोट को भारी क्षति पहुंची है। टिहरी झील में पर्यटकों के आकर्षण के लिए तैयार किए गए फ्लोटिंग रेस्तरां मरीना के एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मरीना बोट के अलावा अन्य फ्लोटिंग सामग्री भी रखरखाव का अभाव झेल रही है। मंगलवार को बोट के डूबने के बाद विभाग हरकत में आया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटना न हो, इसके प्रभावी प्रबंध किए जाएं।
क्यों फट रही जलापूर्ति के लिए नैनीताल में बिछी पेयजल लाइनें
पर्यटन नगरी नैनीताल में हाल में ही पेयजल आपूर्ति के लिए डाली गई लाइनें बार-बार फट रही हैं। मामले की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने बुधवार को नई पेयजल लाइन की जांच के आदेश विभागीय सचिव को दिए हैं। प्रकरण की जांच के लिए महाप्रबंधक उत्तराखंड जल संस्थान नैनीताल डीके मिश्रा की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई हैं। पेयजल लाइन बिछाने में बरती की अनियमितताओं को लाइनें फटने की बड़ी वजह माना जा रहा है। पाइपों की गुणवत्ता और अन्य पहलुओं की जांच के लिए गठित कमेटी में अधीक्षण अभियंता जल संस्थान हल्द्वानी एएस अंसारी, अधिशासी अभियंता उत्तराखंड जल संस्थान नैनीताल एसके उपाध्याय, प्रोजेक्ट मैनेजर एडीबी आरके रजवाड व अधिशासी अभियंता उत्तराखंड पेयजल निगम नैनीताल को सदस्य नामित किया गया है। जांच समिति को मामले की विस्तृत जांच करके एक सप्ताह के अंदर पूर्ण तथ्यों सहित रिपोर्ट मुख्य महाप्रबंधक उत्तराखंड जल संस्थान देहरादून को उपलब्ध करानी है।
पीपीपी मोड पर संचालित होगी मरीना बोट
टिहरी झील में पर्यटन विभाग के फ्लोटिंग रेस्तरां ‘मरीना’ बोट को पीपीपी मोड पर चलाया जाएगा। सरकार पहले ही विभाग को इसका संचालन लोक निजी सहभागिता (पीपीपी) से करने की अनुमति दे चुकी है। आचार संहिता हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पर्यटन विभाग ने टिहरी झील में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए चार करोड़ की लागत से मरीना बोट संचालित की थी, लेकिन सही रखरखाव के अभाव में उसका संचालन नहीं हो पाया। इसके चलते विभाग ने बोट को पीपीपी मोड पर चलाने का निर्णय लिया था। सरकार ने इसकी अनुमति भी दे दी। इस बीच गर्मियां शुरू होते ही झील का जलस्तर घटा और मरीना बोट का एक हिस्सा एक तरफ झुकने से पानी में डूब गया। इससे बोट को खासा नुकसान पहुंचा है। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि आचार संहिता के बाद बोट को पीपीपी मोड पर संचालित करने के लिए प्राइवेट पार्टनर की तलाश की जाएगी। इस दौरान विभाग इसका मरम्मत कार्य भी पूरा कर लेगा।