नारी निकेतन में संवासिनियों के बीमार होने के बाद अब बालिका निकेतन में संक्रमण फैल गया है। एक बालिका को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 13 अन्य बालिकाएं भी संक्रमण की जद में हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद बुधवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बालिका निकेतन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बालिका निकेतन और शिशु निकेतन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं पकड़ीं। गंदगी पर कर्मचारियों को जमकर फटकार भी लगाई। अब बृहस्पतिवार को बाल आयोग की टीम बालिका के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए कोरोनेशन अस्पताल का दौरा करेगी।
नारी निकेतन की जिम्मेदारी संभाल रहा जिला प्रोबेशन विभाग व्यवस्थाओं में सुधार लाने के तमाम दावे करता लेकिन कुछ समय बाद कोई न कोई लापरवाही उजागर हो जाती है। नारी निकेतन में बीमार हुईं 28 संवासिनियों ने फिर से लापरवाही को उजागर कर दिया है। बता दें कि नारी निकेतन की देखभाल और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी महिला आयोग पर होती है, लेकिन आयोग में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है। ऐसे में आयोग में महिलाओं से जुड़े मामले लंबित हैं। उधर बृहस्पतिवार को बाल संरक्षण आयोग की सचिव कामिनी गुप्ता नारी निके तन का निरीक्षण करने जाएंगी।
अध्यक्ष की अनुमति के बिना गोद दिए जा रहे
बाल कल्याण विभाग के अध्यक्ष और अधिकारियों में आपसी तालमेल नहीं है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि विभाग से जब किसी को बच्चा गोद दिया जाता है तो अधिकांश मामलों में अध्यक्ष को विश्वास में नहीं लिया जाता है। वहीं बालश्रम करते पकड़े गए बच्चों को रिलीज करते वक्त भी कई बार सदस्य उनकी अनुमति नहीं लेते हैं।
स्वास्थ्य विभाग से भी ठनी
बाल कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग में ठनी हुई है। विभाग की ओर से अध्यक्ष के निर्देश पर बच्चों को मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता है। बताया गया है कि सीएमओ कार्यालय से इस पर भी संज्ञान नहीं लिया जाता है।
बाल कल्याण समिति ने भी उठाए थे सवाल
बालिका एवं शिशु निकेतन की व्यवस्थाओं पर बाल कल्याण समिति ने भी कुछ समय पूर्व सवाल उठाए थे। समिति की ओर से नेहरू कॉलोनी थाने को भेजी गई रिपोर्ट में गोपनीय जांच करने को कहा था। इसमें समिति ने कहा था कि इन बिंदुओं पर जांच करना जरूरी है कि निकेतन से विद्यालय आते जाते हुए ये लड़कियां किन किन लोगों के संपर्क में आती हैं? क्या कोई मानव तस्करी का गिरोह तो बालिका निकेतन में सक्रिय नहीं है?
पहले भी उजागर हुए लापरवाही के मामले
नारी निकेतन में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी संवासिनी के साथ दुष्कर्म व गर्भपात, पांच संवासिनियों का नारी निकेतन से भागने का प्रकरण, नारी एवं बाल गृह में बच्चों के साथ उत्पीड़न जैसे मामले सामने आ चुके हैं। हमेशा ही यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे हैं। हर बार प्रशासन और सरकार व्यवस्थाओं में सुधार के दावे करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर से कोई न कोई खामी उजागर हो जाती है।
लड़कियों का होता है शोषण
पांच लड़कियों के फरार होने के बाद बाल आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी ने बालिका निकेतन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने बताया था कि बालिका निकेतन में लड़कियों का शोषण होता है। उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। साथ ही लड़कियों को जो भी संस्था या समितियों की ओर से दान में सामान मिलता है उसे भी छीन लिया जाता है।
संवासिनियों की हालत में सुधार
दून अस्पताल में भर्ती नारी निकेतन की संवासिनियों की हालत में सुधार बताया गया है। अस्पताल में एक वरिष्ठ फिजिशियन की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है। नारी निकेतन में चार संवासिनियों की हालत बिगड़ने पर शनिवार को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को उनकी पैथोलॉजी जांचें कराईं गईं थीं। जिनमें दो को टाइफाइड और दो को वायरल बुखार होने की पुष्टि हुई थी। अस्पताल के सीएमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि फिजिशियन डॉ जैनेंद्र की देखरेख में संवासिनियों का इलाज चल रहा है। अब उनकी हालत में सुधार है। संवासिनियों की मेडिकल रिपोर्ट रोजाना सीएमओ को भेजी जा रही है।