भारतीय सेना को आतंकवाद से निपटने के लिए विषम परिस्थितियों का खासा अनुभव है, जबकि इंग्लैंड की सेना तकनीकी रूप से सक्षम है। यह युद्धाभ्यास यूएन चार्टर के अधीन होगा। कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए मिलकर सेनाएं प्रयास कर सकें, इसीलिए युद्धाभ्यास किए जाते हैं।
इससे दोनों देशों के सामरिक रिश्ते भी प्रगाढ़ होंगे। 14 डोगरा रेजीमेंट का चयन इस युद्धाभ्यास के लिए बटालियन की तमाम उपलब्धियों के आधार पर हुआ है। कमान अधिकारी कर्नल अमित सैनी ने बताया कि हमारा सैन्य दल युद्धाभ्यास के लिए पूरी तरह से तैयार है। कहा कि युद्ध कौशल, तकनीकी और सामरिक शक्ति को साझा करते हुए उच्च कोटि का प्रदर्शन किया जाएगा।