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NH-74 घोटाले में बड़े लोगों को बचाना चाहती है BJP सरकार

Sat, 15 Apr 2017 08:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर विवादित बयान से नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश पलट गईं। दो सीटों पर हरीश रावत की पराजय को काला दिन कहे जाने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी अमर्यादित भाषा उनकी नहीं हो सकती।
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इंदिरा हृदयेश ने कहा कि एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में छोटे कर्मचारियों पर तो कार्रवाई हो रही है, लेकिन बड़े और असली नाम अब भी जांच से बाहर हैं। नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि सरकार बड़े लोगों को बचाना चाह रही है। यह पूछे जाने पर कि वे बड़े नाम कौन हैं, तो उन्होंने कहा कि ये जांच एजेंसी बताएगी। भ्रष्टाचार पर उन्होंने कहा कि कहीं ये नारा बनकर न रह जाए। कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ हर एक्शन के पक्ष में है, लेकिन बदले की भावना से कोई काम नहीं होना चाहिए। 

वह कांग्रेस भवन में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहीं थीं। नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद पहली बार पार्टी कार्यालय पहुंचने पर प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और अन्य कांग्रेसजनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
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बयान से पलट गईं नेता प्रतिपक्ष

​पत्रकार वार्ता में हरिद्वार में कांग्रेस और हरीश रावत की हार पर दिए गए उनके बयान से जुड़ा प्रश्न उठा तो वह पलट गईं। उन्होंने ऐसा कोई बयान न देने का दावा किया। कहा कि उनके बयान की फु टेज देखी जा सकती है। चुनाव में सबने मेहनत की।

एक लहर आई, जो सबको बहा ले गई। हार दुर्भाग्यपूर्ण है। वह हैरान हैं कि उनके बयान में काला कहां से आ गया। वह ऐसी अमर्यादित भाषा नहीं बोलतीं। पार्टी में गुटबाजी को लेकर उठे सवाल पर इंदिरा ने कहा कि विचारों में मतभेद हो सकते है, लेकिन यदि मिल-जुलकर नहीं लड़ेंगे तो मुकाबला कैसे कर पाएंगे। चुनाव में जिम्मेदारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो नेतृत्व करता है जिम्मेदारी उसी की होती है। पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी मौजूद थे।

शराब बंद करे सरकार
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार के सामने अब शराबबंदी करने के सिवाय कोई चारा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें हटाने के निर्देश दिए हैं। ये दुकानें गांव-शहरों के बीच खोली जा रही हैं, जिससे प्रदेश की महिलाएं आंदोलनरत हैं। कांग्रेस महिलाओं के साथ है। पार्टी ने विधानसभा में मुख्यमंत्री से शराबबंदी की मांग की थी। सरकार को शराबबंदी का निर्णय लेना चाहिए।
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