डीएवी कालेज में चुनावी महासंग्राम के बीच छात्र नेताओं की हैसियत भी खासे मायने रख रही है। एक छात्र नेता के पिताजी बिजली विभाग में बड़े ठेकेदार हैं। पैसे की कमी नहीं है।
बेटे ने चुनाव लड़ने की ख्वाहिश जताई तो पिता ने भी बेटे को नेता बनाने की ठान ली। आखिर डीएवी नेतागीरी की प्रथम पाठशाला जो ठहरी।
पिता की हैसियत ऐसी है कि खराब मौसम में बेटे को बारिश से बचाने के लिए नई इंडिगो खरीद दी। दूसरे गुटों को जब इंडिगो के बारे में पता चला तो परेशान हो गए।
दूसरे गुटों का कहना है कि जो बाप अपने बेटे पर ऐसे पैसा लुटा रहा है वह निश्चित ही दूसरे प्रत्याशियों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।