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जाबांजों ने खोले राज, जम्मू कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान क्या आती हैं मुश्किलें

Thu, 28 Sep 2017 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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आंतकी हमला - फोटो : PTI
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आतंकियों के लिए कश्मीर के आवाम के बीच पैठ बनाकर अपने काम को अंजाम देना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल सेना के लिए अपनों के बीच से आतंकियों को तलाशकर मारना है। उनका कोई धर्म और ईमान नहीं होता। यह कहना है आतंकियों को मारने वाले हमारे जांबाजों का।
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कुलगाम में आतंकियों को मार गिराने वाले सेना मेडल से सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल लक्ष्मण सिंह देउपा का कहना है कि उन्हें गांव में हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी होने की सूचना मिली थी। कम जवान होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाला। बेहद चुनौतीपूर्ण इस ऑपरेशन में 45 मिनट के भीतर आतंकवादी को मार गिराया, जबकि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई।

उनका कहना है कि सेना के नियमों का पालन करते हुए जनता के बीच से आतंकियों को तलाशकर मारना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा जिले में एक ऑपरेशन में आतंकियों को मारने वाले सेना मेडल से सम्मानित मेजर अमन सिंह का कहना है कि आतंकियों के सिविलियन के बीच घुसने की वजह से परेशानी होती है।
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कई बार रास्ते बेहद संकरे होने से बेहद परेशानी होती है। रात का समय होता है, बर्फ पड़ी होती है। इसके बावजूद देश की रक्षा का जज्बा उन्हें हमेशा आगे बढ़ने को प्रेरित करता है।

कुपवाड़ा में आतंकियों के मंसूबों को नाकाम कर उन्हें मौत के घाट उतारने वाले सेना शौर्य मेडल से सम्मानित लांसनायक धनंजय यादव का कहना है कि आतंकी स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी, अशिक्षा का लाभ उठाकर उन्हें पत्थरबाजी के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आतंकी अब अत्याधुनिक छोटे हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन सेना हर चुनौती से निपटने को हरदम तैयार है।
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