उसने सीडीएस की परीक्षा पास कर अकादमी में प्रवेश प्राप्त किया। अकादमी से सालभर तक कड़ा सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब वह सेना में अफसर बनने जा रहा है। माता-पिता अपने लाडले को मिलने जा रही खुशी के इस दिन का इंतजार कर रहे थे, लेकिन कोरोना (कोविड-19) संक्रमण की वजह से उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पा रही है।
परिजनों की मायूसी इस बात को लेकर भी कि महज कुछ दूरी पर आयोजित हो रही पासिंग आउट परेड के यादगार पलों को वह देख नहीं पा रहे हैं। मोहन सिंह रावत कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे की कामयाबी पर खुशी है लेकिन इस खुशी में शामिल न होने का मलाल भी।
बता दें कि कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार पीओपी में आईएमए की ओर से किसी भी कैडेट्स के परिजनों को बुलावा नहीं भेजा गया है, मोहन सिंह रावत जैसे कई माता-पिता को बेटे की खुशी में शामिल न होने का मलाल है।