वह अपने पीछे पत्नी त्रिलोचनी देवी, दो पुत्र एक पुत्री, दो बहु और नाती-पोते छोड़ गए हैं। त्रिलोचनी देवी ने बताया कि हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में वह मतदान स्थल तक खुद पहुंचे थे। 97 वर्ष की आयु में भी उनका स्वास्थ्य ठीक था। वह सोमवार रात ठीकठाक सोये थे लेकिन मंगलवार सुबह नहीं उठ सके।
स्थानीय पार्षद भूपेंद्र कठैत ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी शूर सिंह चौहान अक्सर अपने संघर्ष की कहानियां सुनाते हुए बताया करते थे कि कई बार अंग्रेजों ने उन्हें अपने साथ विदेश चलने का लालच दिया था, लेकिन उन्होंने अंग्रेजों के हर ऑफर को ठुकरा दिया।
कठैत ने बताया कि चौहान बताया करते थे कि आजादी के आंदोलन में वह कई बार जेल भी गए। वह अक्सर अपने बेटों को देश सेवा के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने बताया कि चौहान रोजाना क्षेत्र में घूमकर लगाकर लोगों से उनका हालचाल जानते थे।