एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी पूरी दुनिया में भारत को एक महा शक्ति के रूप में पहचान दिला रहे हैं तो वहीं आरएसएस भी विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रसार में लगा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए देवभूमि उत्तराखंड को हरियाली पर्व हरेला अब दूर देशों में भी मनाया जाएगा। दुबई, फ्रांस, फिनलैंड समेत जहां भी उत्तराखंड के लोग प्रवास कर रहे हैं वे वहां हरेला मनाएंगे। 16 जुलाई से हरेला शुरू हो जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े संगठन उत्तरांचल उत्थान परिषद् ने विदेशों में रह रहे उत्तराखंडियों समेत सभी भारतीयों से हरियाली पर्व मनाने का आह्वान किया है। इसके साथ ही देश के विभिन्न प्रांतों की प्रवासी पंचायतें भी अभियान से जुड़ रही हैं। प्रवासी पंचायतों के माध्यम से हरेला पर्व को राष्ट्रव्यापी बनाया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण को गति देगा यह पर्व
हरेला-1
- फोटो : अमर उजाला
हरेला पर्व को राष्ट्रस्तर पर मनाए जाने की मुहिम के तहत उत्तरांचल उत्थान परिषद् ने विदेश के अलावा देश के विभिन्न प्रांतों में रह रहे उत्तराखंड के लोगों से इस पर्व से वहां के स्थानीय लोगों को भी जोड़ने के लिए कहा है।
परिषद् के महामंत्री रामप्रसाद पैन्यूली ने बताया कि अलग-अलग प्रांतों की प्रवासी पंचायतें इसकी जिम्मेदारी संभालेंगीं। अप्रवासी उत्तराखंडी संबंधित प्रांत में हरियाली पर्व को अभियान का स्वरूप देंगे ताकि पर्यावरण संरक्षण के कार्य में गति आए।
इसके साथ ही विभिन्न देशों में रहने वाले उत्तराखंड के लोगों से भी अभियान से जुड़ने के लिए कहा गया है। बीते साल इस संबंध में करीब एक दर्जन देशों में रह रहे प्रदेश के लोगों ने सहयोग के लिए सहमति दी थी।
उत्तराखंड में ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
इस वर्ष हरेला पर्व को कार्य रूप देने की लोगों ने सहमति देनी शुरू कर दी है। इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने सिर्फ उत्तराखंड में ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।
प्रांत प्रचारक युद्धवीर सिंह ने बताया कि संघ से जुड़े सभी संगठनों को कार्ययोजना दे दी गई है। संघ के संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपा शंकर का कहना है कि अब पूरे समाज को इस अभियान से जुड़ने का आवश्यकता है। संघ ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक अभियान शुरू कर दिया है।
यह है हरेला
सावन लगने से 9 दिन पहले आषाढ़ में टोकरी या थालीनुमा पात्र में गेहूं, जौ, धान, गहत, भट्ट, उड़द, सरसों आदि पांच या सात प्रकार के बीजों को बोया जाता है। 9 दिन तक इनकी सेवा और पूजा होती है। 4 या 6 इंच लंबे इन पौधों को हरेला कहा जाता है। घर के सदस्य आदर के साथ इन्हें शीश पर रखते हैं। घर की सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में हरेला बोया जाता है। मान्यता है कि हरेला जितना बड़ा होगा, फसल उतनी बढ़िया होगी।