सीमा सड़क संगठन के मुख्य अभियंता विमल गोस्वामी ने बताया कि घटियाबगड़ से नजंग तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। नजंग में उनके वाहन पहुंच गए हैं। अब सीमांत के बूंदी, छियालेख, गर्ब्यांग, गुंजी, कालापानी और नाभीढांग के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिल सकेगी।
कैलाश-मानसरोवर यात्रा, भारत-तिब्बत स्थल व्यापार को बढ़ावा मिल सकेगा। यदि सब कुछ अनुकूल रहा तो सड़क को 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि एनएचडीएल के मानकों के अनुसार सड़क को सभी तरह के वाहनों के लिए जनता को उपलब्ध कराने में कुछ समय लगेगा।
लखनपुर और नजंग की पहाड़ियों को काटने में पिछले दस सालों में ग्रिफ के एक जूनियर इंजीनियर, दो आपरेटर और छह स्थानीय मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। करोड़ों की मशीनें भी इन्हीं चट्टानों में दफन हो गईं थीं।
ग्रिफ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान 65 लाख की लागत का डोजर, 2.5 करोड़ रुपये की डीसी 400 ड्रिलिंग मशीन, 40 लाख रुपये की वेगन डील मशीन सहित कई मशीनें नष्ट हो गई थीं।