परिजनों को बृहस्पतिवार को अखबार के जरिये बेटे के जासूसी मामले में फंसने का पता चला। तब से परिजन स्तब्ध हैं। पिता का कहना है कि पहले हर दूसरे-तीसरे दिन बात होती थी, लेकिन पिछले 10 दिन से कंचन के दोनों मोबाइल नंबर बंद थे। उन्होंने सोचा छावनी की एक्सरसाइज में गया होगा।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में अब तक सेना ने उनसे संपर्क नहीं साधा है। साथ ही दावा किया कि बेटा देश का गद्दार नहीं हो सकता। उसे फंसाया गया होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कोर के अधिकारियों को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कंचन वर्ष 2011 में सेना की सिग्नल कोर में बतौर ऑपरेटर भर्ती हुआ था। जबलपुर में दो साल की ट्रेनिंग के बाद अरुणाचल में पहली पोस्टिंग मिली। तीन साल अरुणाचल में तैनाती के बाद मेरठ तबादला हुआ था।
मेरठ में भी तीन साल तैनानी के बाद अगले माह जम्मू में तबादला होना था। इससे पहले उसने वर्ष 2010 में पीसीएम स्ट्रीम से जीआईसी से इंटर किया। डिग्री कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश के दौरान उसका सेना में चयन हो गया था। सेना में रहते हुए ही कंचन ने वर्ष 2015 में प्राइवेट से बीए किया। परिजनों के साथ ही शिक्षकों का कहना है कि वह पढ़ाई में अच्छा था।
फौज में परिवार का पहला सदस्य
कंचन फौज में जाने वाला अपने परिवार का पहला सदस्य है। उसके परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि खेती है। दादा-परदादा किसान रहे हैं। कंचन खुद की इच्छा से पढ़ाई बीच में छोड़कर फौज में भर्ती हुआ था। मां कमला का कहना है कि कंचन तंबाकू, सिगरेट, शराब से कोसों दूर रहता है। उसके वेतन से ही वे लोग हाल ही में बनाए गए मकान का कर्ज चुकाते थे।
कंचन के जासूसी मामले में पकड़े जाने का मामला पुलिस और खुफिया विभाग भी हरकत में आ गया है। खुफिया पुलिस ने बृहस्पतिवार अपराह्न कंचन के घर जाकर परिजनों से पूछताछ की। इस दौरान पुलिस ने परिजनों के खाते भी खंगाले।
देर शाम तक बैंकों में कंचन के पिता, भाई, चाचा के खातों की जानकारी जुटाई गई। हालांकि अब तक कोई भी बड़ा लेनदेन प्रकाश में नहीं आया है। पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया।
दिनभर पुलिस, प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे। प्रभारी एसपी पंकज भट्ट ने बताया कि गोपनीयता के तहत इस प्रकरण में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ब्यूरो
पाक के लिए जासूसी करने के आरोपी सैन्यकर्मी कंचन के गांव वालों को भी उसकी करतूत पर सहसा यकीन नहीं हो रहा। उन्हें यह मानने में कठिनाई हो रही है कि सीधा-सरल कंचन देश के दुश्मनों का साथ दे सकता है। उन्होंने भी कंचन को साजिशन फंसाने की आशंका जताई है। दूसरी ओर परिजनों में मायूसी छाई है।
गढ़ियागांव में लोगों में आजकल चर्चा का विषय कंचन ही है। ग्रामीणों और भूतपूर्व सैनिकों ने घर जाकर कंचन के परिजनों को ढाढ़स बंधाया। गांव के सुरेश पांडे ने बताया कि कंचन बुरी आदतों और दुर्व्यसनों से दूर रहता था। वह सौम्य और सरल व्यवहार का है। वह दुश्मन देश के लिए जासूसी जैसा काम कैसे कर सकता है। कंचन की मां कमला ने बताया कि वह घर से वापस ड्यूटी जाने के लिए किराया मांगता था। बड़े भाई जगदीश ने बताया कि कंचन छुट्टी पर आने के दौरान उनके कपड़े पहनता था। छोटे चाचा राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह किसी शौक या व्यसनों से दूर था। पिता चंदन सिंह ने बताया कि उन्होंने सेना को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
खुफिया पुलिस ने खंगाले संपर्क और संबंध
दूसरे दिन भी खुफिया पुलिस ने कंचन के स्थानीय संपर्क और संबंधों के साथ ही परिजनों के बैंक खातों में लेनदेन के मामले खंगाले। इंटेलीजेंस ने दूसरे दिन भी परिजनों से पूछताछ की। इस कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। प्रभारी एसपी पंकज भट्ट का कहना है कि इस केस में कुछ नहीं कहा जा सकता।