उन्होंने बताया कि जनवरी 2018 में सेना की ओर से दलबीर को रिटायर कर दिया गया और साथ में दिया तीमारदार भी हटा दिया गया। 13 सितंबर 2018 को सैनिक को हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। इंद्रा देवी का कहना है कि वह कंडारीखोड़ प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका है। एकल शिक्षिका होने के चलते अवकाश भी नहीं मिल रहा है। साथ ही दो बच्चों की जिम्मेदारी भी है। हल्द्वानी में दलबीर की देखभाल के लिए भी कोई नहीं है।
अस्पताल में 25 से 30 हजार प्रतिदिन उपचार और तीमारदार का खर्चा है। उन्होंने कहा कि दलबीर को सेना ने रिटायर तो कर दिया, लेकिन 8 माह बाद भी पेंशन नहीं मिल पाई है। ऐसे में दलबीर की देखभाल में दिक्कतें आ रही हैं।
जवान का सेवानिवृत्ति के बाद ईसीएच कार्ड बना दिया गया है, जिसका नंबर अस्पताल को उपलब्ध करा दिया गया है। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही अस्पताल का भुगतान होगा। सैनिक के पेंशन संबंधी कागजात रिकार्ड आफिस में होते हैं। यदि कोई परिजन लेने आएगा तो उन्हें उपलब्ध करा दिए जाएंगे। सेवानिवृत्त होने के बाद परिजनों को स्वयं दलबीर का तीमारदार रखने की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
- सूबेदार मेजर रमेश सिंह, सेकंड गढ़वाल राइफल।