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5321 मीटर की ऊंचाई पर भारतीय जवानों ने लहराया तिरंगा, चाकलेट-पानी के सहारे काटे आखिरी 4 दिन

Sun, 24 Sep 2017 09:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)
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भारतीय जवानों ने लहराया तिरंगा
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नंदादेवी और नंदाकोट पर्वतमालाओं के मध्य में 5321 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ट्रेल पास पर तिरंगा फहराने में भारतीय सेना के पर्वतारोहियों ने कामयाबी हासिल कर ली है। इस कामयाबी को हासिल करने में सेना के इन चार जवानों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा समस्या अंतिम चरण में हुई जब टीम को मिशन पूरा करने चॉकलेट और पानी पीकर चढ़ाई करनी पड़ी। दरअसल खाना बनाने के लिए ईधन रास्ते में ही गिर गया, इसकी वजह से भोजन बनाने की समस्या आ गई थी।
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सेना के आयुध कोर सिकंदराबाद के 15 सदस्यीय अभियान दल ने टीम लीडर कैप्टन चिराग चटर्जी के नेतृत्व में चार सितंबर को बागेश्वर से ट्रेल पास के लिए अभियान शुरू किया। यह टीम बागेश्वर से लोहारखेत, खाती, द्वाली, पिंडारी ग्लेशियर तक पहुंची। वहां से ट्रेल पास से कुछ दूरी पर आधार शिविर बनाकर उसमें चढ़ने का प्रयास किया।

19 सितंबर को अभियान दल के छह पर्वतारोहियों ने इस दुर्गम चोटी तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। टीम लीडर ने बताया कि अभियान दल के सदस्यों को अंतिम चरण में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पिंडारी ग्लेशियर पहुंचने पर उनका मिट्टी के तेल का डिब्बा गिर गया था। इस कारण भोजन बनाने की समस्या खड़ी हो गई। अभियान दल के सदस्यों ने चार दिन तक सिर्फ चाकलेट खाकर और पानी पीकर अभियान को पूरा किया। वापसी में यह दल लास्पा, रिलकोट, लीलम होते हुए मुनस्यारी पहुंचा। दल के साथ डॉक्टर सिमरत सिंह भी थे। बताया गया है कि 1860 से अब तक ट्रेल पास के अभियान में 86 दल जा चुके हैं, लेकिन सिर्फ 15 दलों को ही कामयाबी मिल पाई।
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अंग्रेज अफसर के नाम पर पड़ा नाम
टीम लीडर ने बताया कि इसे पार करने में सबसे पहली कामयाबी 1830 में बागेश्वर के सूपी गांव निवासी मलक सिंह को मिली थी। करीब 100 साल बाद 1926 में प्रथम ब्रिटिश कमिश्नर जीडब्लू ट्रेल ने इस दर्रे को पार करने का प्रयास किया, लेकिन वह विफल रहे। पर बाद में उनके नाम से ही इसे ट्रेल पास कहा जाने लगा। विकेपीडिया के मुताबिक ट्रेल पास से पहले इसे पिंडारी कांडा नाम से जाना जाता था।
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