सीएम रावत ने कहा कि इसके लिए प्रस्ताव भेजा जाए। आवश्यक परीक्षण करवाकर सरकार इसकी अनुमति देगी। सरकार हमेशा से ही सेना को सहयोग को आगे रहती है। सामरिक दृष्टि से उत्तराखंड बेहद संवेदनशील है।
लिहाजा, अगर पर्यावरण और पहाड़ों को कोई नुकसान नहीं होता तो सरकार सेना को जल्द ही इसकी अनुमति देगी। वायु सेना अफसरों ने धरासू, गौचर और पिथौरागढ़ हवाई पट्टियों को दुबारा सक्रिय करने में सहयोग पर सीएम का आभार प्रकट किया।
विंग कमांडर आशुतोष मिश्रा ने बताया कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इसके लिए संयुक्त सर्वे कर लिया गया है। यह क्षेत्र आबादी से काफी दूर है। प्रशिक्षण में बहुत ही कम क्षमता के बमों का प्रयोग किया जाता है।
विंग कमांडर ने बताया कि वर्ष में केवल तीन सप्ताह के लिए क्षेत्र की आवश्यकता होगी। प्रशिक्षण के दौरान जो भी बम गिराए जाते हैं, उन्हें इकट्ठा कर साफ करने की जिम्मेवारी वायुसेना की होगी। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर सचिव डॉ. एमएस बिष्ट, एयर कोमोडोर सुमित बनर्जी, ग्रुप कैप्टन आशुतोष श्रीवास्तव, एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा उपस्थित रहे।