1962, 1965 और 1971 का युद्ध भी देखा
भारत-पाकिस्तान के 1971 में हुए युद्ध के समय वह 34 साल की थीं। अब फिर से दोनों देशों के बीच तनातनी की खबरें सुनीं तो उन्हें वो वक्त याद आ गया। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनके पति करमचंद फौज में थे। 1962 और 1965 का युद्ध वे लड़ चुके थे, लेकिन जब 1971 में दोबारा युद्ध छिड़ा तो उस वक्त डर का माहौल ज्यादा था। 71 के युद्ध के समय फौजी पति रिटायर होकर घर आ चुके थे, लिहाजा वो बचने के लिए हमें व पड़ोसियों को निर्देशित करते थे, सब उनकी सुनते थे।
हर तरफ बस सायरन की आवाज आती थी। आवाज सुनते ही हम भागकर कमरों में छिप जाते थे। सरकार की तरफ से भी कोई खास राहत नहीं मिलती थी तब। बड़ी-बड़ी टोपियां पहनकर पुलिस वाले आते थे। वे डंडे मारकर घरों में खदेड़ देते थे। अचानक से छिप जाओ...छिप जाओ की आवाज आती थी तो हम भागकर घरों में छिप जाते थे। सरकार की तरफ से निर्देश आते थे कि रोशनी ना करें, धुंआ नहीं करना है।
घरों के अंदर ही रहो... तब हम सब एक साथ ही एक कमरे में रहते थे। कुछ पता नहीं था कि बचेंगे या नहीं। बस डर-डर कर समय काटते थे। किसी के शहीद होने की खबर आती थी तो मन कांप उठता था। हर तरफ चीत्कार थी बस। डर के माहौल के बीच बस यही दुआ करते थे कि किसी तरह हम बच जाएं, हमारा देश जीत जाए और इन हालातों से मुक्ति मिल जाए। जब भारत के जीतने की खबर सुनीं तो हम खुश भी थे और आंखों में आंसू भी थे।