उन्होंने कहा कि कालापानी में सरहद का स्थलीय सीमांकन मंदिर परिषद के 50 मीटर दूर नाले में है। इसके बाद कौवा क्षेत्र की ओर नेपाल का इलाका पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कालापानी और नाभीढांग का पूरा इलाका भारत का है और गर्ब्यालों की नाप भूमि है। जिसमें नेपाल का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि दो लिपुलेख है एक भारत में जबकि दूसरा नेपाल में है। नेपाल का लिपुलेख नेपाल के तिंकर गांव से 25 किमी आगे है जो अलग लिपुलेख नाम से है। नेपाल सरकार लिपुलेख नाम का फायदा उठाकर गुमराह कर रही है।
कालापानी और लिपुलेख की जमीन भारत की है। यह भारत का अभिन्न हिस्सा है। स्थानीय लोगों के नाम पर यह भूमि दर्ज है। इसके साक्ष्य उपलब्ध हैं।
-अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम धारचूला।
लिपुलेख और कालापानी को लेकर सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा का कहना है कि कालापानी और लिपुलेख भारत का हिस्सा है। दोनों देशों के रोटी-बेटी के रिश्ते हैं। इस मामले पर दोनों देश बैठकर बातचीत से मसले का हल निकालेंगे।
सांसद अजय टम्टा ने कहा कि भारत-नेपाल मित्र राष्ट्र हैं। सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से दोनों एक हैं। दोनों राष्ट्रों के नागरिक देवी-देवताओं और ईस्ट देवता की पूजा के लिए एक दूसरे के देश में जाते हैं। कैलाश मानसरोवर की यात्रा सुगम हो इसलिए भारत ने अपनी भूमि में लिपुलेख तक सड़क का निर्माण किया है। सीमा पर विवाद या शंका जैसी कोई स्थिति नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा है तो दोनों मित्र राष्ट्र बातचीत करेंगे और मामले का समाधान किया जाएगा।