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दो-दो आदेश फिर भी दो कदम आगे नहीं बढ़ी भारत को नेपाल सीमा से जोड़ने वाली सड़क

Mon, 27 Jul 2020 01:27 AM IST
अलका त्यागी चंद्रशेखर जोशी, अमर उजाला, चंपावत 

सार

  • सितंबर 2019 में री - टेंडरिंग और इस साल दो जून को आर्बिटेशन ने दिया आदेश 
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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रोटी-बेटी के रिश्तों के बावजूद उत्तराखंड के चंपावत जिले की टनकपुर से लगी नेपाल सीमा तारबाड़ के विवाद की वजह से चर्चा में है। इसी नेपाल सीमा से लगी निर्माणाधीन टीजे (टनकपुर-जौलजीबी) रोड के दूसरे पैकेज में निविदा विवाद के चलते करीब 35 महीने से काम लटका हुआ है। वहीं, री-टेंडरिंग पर रोक हटने के दस महीने और आर्बिटेशन का फैसला आने के 54 दिन बाद भी कोई प्रगति नहीं है। न तो आर्बिटेशन के निर्णय को चुनौती दी गई है और न काम शुरू हो सका है। 

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टीजे रोड के 24.40 किमी लंबे दूसरे पैकेज (चूका से रूपालीगाड़) को लेकर तीन सदस्यीय आर्बिटेशन (आर्बिटेटर एके सिंघल, एके बिष्ट और पवन कुमार) ने दो जून को ठेकेदार दिलीप सिंह अधिकारी को सात करोड़ सात लाख 64 हजार 696 रुपये देने का आदेश दिया था।

आदेश आने के बाद लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने आर्बिटेशन के फैसले पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। इस मामले पर पीआईयू (परियोजना क्रियान्वयन इकाई) कुछ बोलने से बच रहा है। अलबत्ता सूत्रों के मुताबिक, आर्बिटेशन के आदेश को देहरादून की जिला अदालत में चुनौती देने पर गंभीरता से विचार होने की बात सामने आई है। पीआईयू के ईई राजेश पुनेठा का कहना है कि दूसरे पैकेज को लेकर जो भी आदेश मिलेंगे, उसके अनुरूप कार्य किया जाएगा। 

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ये था विवाद 

टीजे मोटर मार्ग के दूसरे पैकेज चूका से रूपालीगार पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर निविदा हासिल करने का आरोप लगा था। लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल द्वारा मामले को उठाने के बाद शासन की उच्च स्तरीय जांच में 2018 में आरोपों की पुष्टि हुई। साथ ही अगस्त में निविदा को निरस्त करने के साथ री-टेंडरिंग पर रोक लगा दी गई थी। सितंबर 2019 में री-टेंडरिंग पर लगी रोक हटी। और ठेकेदार पर लगे आरोप भी अदालत ने इस साल मार्च में खारिज कर दिए। जबकि दो जून को आर्बिटेशन ने मुआवजा देने का आदेश दिया था। वहीं री-टेंडरिंग में हीलाहवाली के चलते सात जुलाई को दो अधीक्षण अभियंताओं को भी निलंबित किया गया। 

35 माह से बंद है चूका-रूपालीगाड़ मार्ग में काम 
टीजे रोड के दूसरे पैकेज चूका से रूपालीगाड़ के बीच आखिरी बार काम 24 अगस्त 2017 को हुआ था। 25 अगस्त से यह काम बंद हो गया था और तबसे काम पर ब्रेक लगा हुआ है। यह स्थिति तब है जबकि नेपाल की ओर से पिछले महीने जारी किए गए नए राजनीतिक मानचित्र, टनकपुर में नो मैंसलैंड में हालिया विवाद के चलते रिश्तों की गरमाहट और बढ़ गई है। ऐसे में इस रोड का महत्व और बढ़ जाता है। 

नेपाल सीमा को विभाजित करने वाली काली नदी के समानांतर बनने वाली इस टीजे रोड का असल मकसद भी सुरक्षा चौकसी को पुख्ता करने और एसएसबी की बीओपी (बार्डर आउटपोस्ट) तक आधारभूत ढांचे को बेहतर करना था। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बीओपी तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 135 किमी के टीजे मार्ग को मंजूरी दी थी।
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एसएसबी की 34 बीओपी में से 19 रोड से कटी हुई

सीमा सुरक्षा के लिए इस इलाके में एसएसबी की 34 बीओपी में से 19 रोड से कटी हुई है। पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र के चलते रूपालीगाड़ से आगे का काम पहले से ही लटका हुआ है। बस ठुलीगाड़ से चूका तक के 17.875 किमी के पहले पैकेज में ही रोड कटिंग और डामर का काम पूरा हो सका है। अलबत्ता चूका में बनने वाले पुल के अलावा पहले पैकेज में भी तीन पुल अभी बनने हैं।

इस मसले पर सोमवार को देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात करूंगा। टनकपुर-जौलजीबी रोड के पुल को शुरू करवाने के साथ पैकेज दो में आर्बिटेशन के फैसले के खिलाफ तर्कपूर्ण कार्रवाई करने का आग्रह किया जाएगा। पुल के बगैर पैकेज दो में चूका से आगे के काम का कोई लाभ नहीं होगा। 
पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक विधायक, लोहाघाट। 
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