ट्रांसजेंडर का हार्मोंस ट्रीटमेंट, बॉयोलोजिकल ट्रीटमेंट, साइक्लोजिकल ट्रीटमेंट, शिक्षा, रोजगारपरक शिक्षा, रोजगार के अवसर मुहैया कराना आदि।
भविष्य में ये भी हैं प्रयास
थर्ड जेंडर को पिछड़ा वर्ग मानते हुए शिक्षा व नौकरी में आरक्षण
सामाजिक भेदभाव खत्म कर मुख्यधारा में लाना
समाज में एक दूसरे के प्रति स्वीकार्यता को बढ़ाना
जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि हाल में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने थर्ड जेंडर के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश दिया है कि यदि कोई भी ट्रांसजेंडर मेल से फीमेल या फीमेल से मेल बनता है और वैवाहिक जीवन व्यतीत करता है तो उसका विवाह हिंदू मैरिज एक्ट के तहत मान्य समझा जाए तथा उस जोड़े को विवाह प्रमाण पत्र जारी करना होगा।
ट्रांसजेंडर के केस ने बदली सोच
जिला जज डॉ. शर्मा बताते हैं कि वर्ष 2006-07 में उनकी अदालत में ट्रांसजेंडर का एक मामला आया। अदालत में बहस के दौरान ट्रांसजेंडर की परेशानी, उनके प्रति समाज की सोच देखकर बहुत पीड़ा हुई। तभी उन्होंने इस वर्ग के लिए काम करने का फैसला किया। शर्मा पिछले दस सालों में कई सेमिनारों में हिस्सा ले चुके हैं, जल्द ही वह अमेरिका के न्यूयार्क में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में भी हिस्सा लेंगे।
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