अभी भारत वर्ष 1962 के युद्ध के बाद पैदा हुई स्थिति से निपटने की तैयारियां ही कर रहा था कि वर्ष 1965 में एक और युद्ध सामने आ खड़ा हुआ। पड़ोसी पाकिस्तान को अमेरिका ने 3000 डॉलर के हथियार मुहैया कराए थे। इनमें उस समय अजय माने जाने वाले 200 अजय टैंक और तत्कालीन उन्नत श्रेणी के लड़ाकू विमान भी शामिल थे। इसी के दम पर पाकिस्तान भारत पर कच्छ से हमला बोल दिया। मेजर जनरल इयान कार्डोजो (सेवानिवृत्त) ने कहा कि उस वक्त पाकिस्तान को लगा था कि भारत, चीन से युद्ध के बाद बहुत कमजोर पड़ गया है।
लेकिन, इस युद्ध के एक साल पहले एक बड़ी बात हुई थी, वह थी पंडित नेहरू की मौत। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री ने देश की कमान संभाली थी। शास्त्री कद में छोटे थे तो पाकिस्तान की ओर से उनके कद को लेकर भी तमाम व्यंग्य किए जाते थे। इसके उलट शास्त्री बेहद दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी व्यक्तित्व वाले थे। उन्होंने सेना को तनिक भी झिझकने नहीं दिया। मेजर जनरल वीके सिंह ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हाजी पीर इलाके में महज 24 घंटों के भीतर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना लाहौर तक पहुंच गई थी। चंद दिनों में ही इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को धूल चटाई और उसे शांति समझौते तक पहुंचा दिया।
वर्ष 1971 की भारत-पाक की लड़ाई पिछले सभी युद्धों से अलग थी। पिछले युद्धों में सेना किसी न किसी कारण से तैयार नहीं थी। जबकि, इस युद्ध में सेना को पूरी तरह जानकारी थी कि पाकिस्तान इस तरह की हरकत करेगा। इसका कारण था कि पश्चिमी पाकिस्तान लगातार पूर्वी पाकिस्तान में बर्बरता कर रहा था। इसी बीच सूचनाएं छन छनकर आ रहीं थी कि पाकिस्तान कभी भी भारत पर हमला करेगा। जनरल मानेक्शॉ के जोशीले अंदाज के कारण सेना में स्फूर्ति थी। हर वक्त हर मोर्चे पर सेना तैयार थी। इस युद्ध का परिणाम यह हुआ कि अब तक पाकिस्तान के लगभग एक लाख सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया और भारत के शौर्य के बल पर ही पूर्वी पाकिस्तान को पश्चिमी पाकिस्तान से मुक्त कर दिया। इसके स्थान पर बंग्लादेश का जन्म हुआ।
कारगिल युद्ध दे गया भारत को कई सीख
भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है जिसके दो पड़ोसी परमाणु संपन्न हैं और दोनों से संबंध मधुर नहीं हैं। यही कारण था कि दोनों पड़ोसियों ने एक नहीं बल्कि कई बार भारत को धोखा देकर हानि पहुंचाई है। इसके बाद वर्ष 1999 में हुआ कारगिल युद्ध भारत को कई सीख दे गया। लंबे समय से कोई बड़ा आक्रमण न होने के कारण सेना और सरकार भी यही समझ बैठी थी कि शायद पाक अब कोई हरकत नहीं करेगा। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) रणधीर सिंह ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने मुजाहिद्दीनों के साथ मिलकर कारगिल क्षेत्र पर छद्म हमला किया था। कई महत्वपूर्ण पोस्ट उसने कब्जा लीं थी। ऐसे में उसे लगा कि इस बार वह भारत को हराकर रहेगा। हालांकि, भारतीय फौज के शौर्य के आगे पाक को इस बार भी मुंह की खानी पड़ी। इस युद्ध में भारतीय सेना के चार जाबांजों को परमवीर चक्र मिला था।