सोर में आंदोलन के स्तंभ थे स्वर्गीय पंत
स्वाधीनता सेनानियों पर पुस्तक लिख चुके राजेश मोहन उप्रेती कहते हैं कि जिस तरह कूर्मांचल केशरी बद्री दत्त पांडे, हरगोविंद पंत, मोहन जोशी कुमाऊं में स्वाधीनता आंदोलन के जागृति स्तंभ माने जाते हैं, उसी प्रकार प्रयाग दत्त पंत परगना सोर (पिथौरागढ़) के स्वाधीनता आंदोलन के स्तंभ माने जाते हैं।
इनका भी अहम योगदान
हुड़ेती (पिथौरागढ़) के कृष्णानंद उप्रेती, मुनस्यारी के शहीद सेनानी त्रिलोक सिंह पांगती, चिटगल के ईश्वरी दत्त पंत, कमतोली के उदयराम भट्ट, बनकोट के उमेद सिंह बनकोटी, पिथौरागढ़ के गंगा दत्त शर्मा, दरकोट मुनस्यारी के कैलाशानंद उर्फ कुंदन सिंह, गंगोलीहाट के दुर्गा सिंह रावत, शेर सिंह, जवाहर सिंह खाती, गोपाल दत्त पाठक, चंचल सिंह रावल, डीडीहाट के देव सिंह डसीला, दिगरा मुवानी के जवाहर सिंह मारकुना समेत पिथौरागढ़ के 205 स्वाधीनता सेनानियों ने आजादी की जंग में अंग्रेजों ने दांत खट्टे किए थे।