अब इस धारा-16 में नया खंड-ग जोड़ दिया गया है। इसके तहत अगर प्राधिकरण को जानकारी मिलती है कि धारा-3 की उपधारा-1 (धर्म संबंधी शिक्षा के लिए प्राधिकरण से मान्यता की अनिवार्यता) का उल्लंघन करते हुए धार्मिक शिक्षा दी जा रही है। या धारा-14 का उल्लंघन किया जा रहा है तो पूरी जांच के बाद प्राधिकरण ऐसे संस्थानों पर तालाबंदी करते हुए उनके संचालकों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाएगा। वहां प्रशासक नियुक्त कर सकेगा। किसी आपराधिक कृत्य पर संगत कानून की धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज करा सकता है। इस कार्रवाई से पूर्व संस्थान के संचालकों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाएगा।
मान्यता संबंधी धारा-14 के तहत ये नियम अनिवार्य
कानून में इस संशोधन के बाद अब मदरसों व अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को अधिनियम की धारा-14 के प्रावधान मानने ही होंगे। इसमें स्पष्ट किया गया है कि मान्यता तभी मिलेगी जब संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से स्थापित और संचालित हो। संस्थान परिषद यानी बोर्ड से संबद्ध हो। संस्थान के प्रबंधन की सोसाइटी रजिस्टर्ड हो। संस्थान की भूमि उक्त सोसाइटी, न्यास या कंपनी के नाम हो। संस्थान का वित्तीय लेन-देन अनिवार्य रूप से बैंक में खोले खाते से हो रहा हो। सोसाइटी में निदेशक व अधिकांश पदों पर अल्पसंख्यक हों। सोसाइटी अल्पसंख्यकों समुदाय के हितों की सेवा को बनी हो। संस्थान अपने छात्र, कर्मचारियों को किसी धार्मिक गतिविधि में शामिल होने को बाध्य न करे। निर्धारित योग्यता के हिसाब से शिक्षक हों। संस्थान ऐसा कोई काम न करे जो सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव की राह में बाधा पैदा करे।