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चिड़ियों की सुरक्षा को गश्त बढ़ाने व ग्रामीणों को जागरूक बनाने के दिए निर्देश

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प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन ने साइबेरिया सहित अन्य स्थानों से आए पक्षियों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। आसन बैराज झील के आसपास कूड़ा-करकट देखकर चिंता जताई और वन विभाग को विशेष सफाई रखने के निर्देश दिए।
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प्रमुख वन संरक्षक व वानिकी प्रशिक्षण एवं कौशल विकास व वन प्रबंधन अनुसंधान के महानिदेशक डॉ. धनंजय मोहन ने आसन बैराज का निरीक्षण किया। झील में प्रवास कर रहे प्रवासी पक्षियों का प्रमुख वन संरक्षक ने जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने झील के किनारों पर पर्यटकों के माध्यम से फैलाए गए कूड़े पर चिंता जताई। कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण ऐसे स्थानों पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग के माध्यम से किए इंतजामों की विस्तार से जानकारी ली। वन विभाग को क्षेत्र में गश्त बढ़ाने व आसपास के ग्रामीणों को पक्षियों के संबंध में जागरूक बनाने के भी निर्देश दिए।
इसके पहले उन्होंने रामपुर मंडी स्थित वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया। केंद्र पर मौजूद सुविधाओं व समस्याओं के बारे में प्रशिक्षुओं से जानकारी ली। प्रमुख वन संरक्षक ने केंद्र पर जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। निरीक्षण के दौरान चकराता वन प्रभाग की डीएफओ कल्याणी, वन दरोगा व पक्षी विशेषज्ञ प्रदीप सक्सैना, अनिल रावत, राहुल चौहान आदि मौजूद रहे।
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41 प्रजातियों के तीन हजार से अधिक पक्षी पहुंचे
आसन बैराज की झील में रंग-बिरंगे पक्षियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अभी तक झील में 41 प्रजातियों के तीन हजार से अधिक पक्षी पहुंच चुके हैं। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि अभी कई अन्य प्रजातियों के पक्षी झील में अपना आशियाना बनाने के लिए पहुंचेंगे।
आसन बैराज की झील में हर साल सर्दी के मौसम में अत्यधिक ठंडे देशों व उच्च हिमालयी क्षेत्रों से भारी संख्या में पक्षी प्रवास के लिए पहुंचते हैं। पक्षियों की आमद का यह सिलसिला अक्तूबर के आखिरी व नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाता है। झील में कुल मिलाकर 45 से 50 प्रजातियों के पांच से छह हजार के बीच पक्षी पहुंचते हैं। कभी-कभी इनकी संख्या सात हजार को भी पार कर जाती है। पक्षी विशेषज्ञ प्रदीप सक्सैना का कहना है कि जिस प्रकार से पक्षियों की आमद हो रही है, उससे उम्मीद है कि जल्दी ही कई अन्य प्रजातियों के पक्षी झील में अटखेलियां करते नजर आएंगे।
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