देहरादून में मांगें निस्तारित न होने से खफा विभिन्न कर्मचारी संगठन इन दिनों आंदोलनरत हैं। धरना-प्रदर्शन का दौर जारी है। परेड ग्राउंड पर प्रदर्शनों के दौरान विभिन्न संगठनों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
आमरण अनशन का छठा दिन
संविदा कर्मचारी घोषित करने की मांग पर मनरेगा कर्मचारी संगठन का आमरण अनशन बुधवार को छठे दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने कहा कि मनरेगा के काम ठप होने से कई गांवों के लोग परेशान हैं, लेकिन शासन-प्रशासन सुध नहीं ले रहा।
अनशन पर बैठे अनिल तोपाल, दिनेश तिवारी, राकेश जोशी, किशन नकोटी और केदार सिंह ने कहा कि मांगों का निस्तारण होने तक अनशन जारी रहेगा।
सरकार कर रही अनदेखी
बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के क्रमिक अनशन के दौरान सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने स्कूलों में नियुक्ति का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया गया।
प्रदेश अध्यक्ष सुंदर धोनी ने कहा कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत स्कूलों में आउटसोर्सिंग से नियुक्तियां हो रही हैं, लेकिन इसमें भी प्रशिक्षित बेरोजगारों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।
आत्मदाह की चेतावनी
बेरोजगार डिप्लोमा आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने नियुक्ति की मांग पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि शीघ्र 180 पदों पर स्थायी फार्मेसिस्टों की नियुक्ति सहित छह सूत्री मांगें न मानी गई तो 19 अक्तूबर को वे आत्मदाह करेंगे।
प्रदर्शनकारियों में रोहन चौहान, नरेश रमोला, हिमांशु किमोठी, कुलवीर, दीपक भंडारी आदि शामिल रहे।
19 को सीएम आवास कूच
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 19 अक्तूबर को मुख्यमंत्री आवास कूच का ऐलान किया है।
परेड ग्राउंड में धरने पर बैठे कार्यकत्रियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पदभार ग्रहण करते हुए केंद्र के समान राज्यांश देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। धरने पर ज्योतिका पांडे, रेखा रावत, पूनम गुरुंग, नीलम, पिंकी, मीनाक्षी आदि बैठीं।
पुलिस में बहाली की मांग
पुलिस में बहाली की मांग पर बर्खास्त पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन किया। कहा गया कि सरकार ने दो जिलों से आवेदन पर उन्हें तो बाहर कर दिया, लेकिन इसी तरह आवेदन करने वाले अस्सी प्रतिशत कांस्टेबल अब भी पुलिस में तैनात हैं।
प्रदर्शन करने वालों में धीरेंद्र पंवार, आशीष चौहान, अंकित खन्ना, जसपाल कंडारी, मुन्ना सिंह चौहान, महावीर, जयपाल पंवार आदि शामिल रहे।
हमको क्यों छोड़ दिया
शिक्षामित्रों के रूप में समायोजन की मांग पर शिक्षा आचार्यों का धरना बुधवार को 501वें दिन भी जारी रहा।
शिक्षा आचार्यों ने कहा कि 1745 शिक्षा आचार्यों में से 1113 को समायोजित कर दिया गया, लेकिन 770 शिक्षा आचार्यों को छोड़ दिया गया है। संगठन के रामकृष्ण ममगाईं और बीना देवी ने कहा कि सरकार वादाखिलाफी कर रही है।
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