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डॉक्टर बन जाना तो चारधाम में सेवा देने जरूर आना : धन सिंह

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I14 करोड़ की लागत से तैयार छात्रावास में 48 कमरे हैंI
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के नवनिर्मित सुश्रुत पीजी छात्रावास का उद्घाटन चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बुधवार को किया। 14 करोड़ की लागत से तैयार छात्रावास में 48 कमरे हैं। इसके अलावा मेस, जिम और किचन की सुविधा भी उपलब्ध है। इस छात्रावास का नाम प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक महर्षि सुश्रुत के नाम पर रखा गया है।



छात्रावास के लोकार्पण में एनएमओ कांफ्रेंस के लिए देशभर से आए एमबीबीएस छात्र भी मौजूद थे। डॉ. धन सिंह रावत ने छात्रों का स्वागत करते हुए छात्रों से आह्वान किया कि डॉक्टर बन जाने के बाद साल में एक बार 15 दिन को चारधाम में सेवा देने के लिए उत्तराखंड जरूर आएं। आपके रहने और खाने का खर्च सरकार उठाएगी। इसके साथ ही एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत उत्तराखंड के डॉक्टर दूसरे राज्यों में जाएंगे और दूसरे राज्यों के डॉक्टर उत्तराखंड आएंगे। इससे डॉक्टर एक दूसरे की नई तकनीक, एक्टिविटी, इलाज करने की पद्धति समेत विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में जानेंगे। इससे चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम के समापन पर एमएस डॉ. अनुराग अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान सीएमओ डॉ. संजय जैन, डॉ. केसी पंत, डॉ. अभय, डॉ. अनंत सिंह, डॉ. आरएस बिष्ट, डॉ. सुशील ओझा, डॉ. योगेश्वरी, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी मौजूद रहे।
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Iग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट का रखा पूरा ख्यालI

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने कहा कि यहां पूर्व में एमएस आवास हुआ करता था। अब यहां पीजी छात्रावास का निर्माण किया गया है। भवन निर्माण में ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट का पूरा ख्याल रखा गया है। राजपुर रोड विधायक खजानदास ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बड़ी चुनौती रही है। हालांकि राज्य सरकार सराहनीय काम कर रही है। आज स्वास्थ्य में मानव संसाधन की कमी काफी हद तक दूर हो गई है। वहीं, अवस्थापना विकास में भी लगातार काम हो रहा है।
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Iपीजी की सीट और एमबीबीएस करने वाले छात्र बढ़ रहेI

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि 2014 से पहले देश में 53 हजार एमबीबीएस की सीट थीं। अब हर साल एक लाख 13 हजार बच्चे एमबीबीएस कर रहे हैं। पीजी की सीट 19 हजार से बढ़कर 60 हजार हो गई हैं। पहले एक एम्स था अब कई एम्स खुल गए हैं। मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए न केवल शिक्षा बल्कि आगे रोजगार के भी अवसर बढ़े हैं। एक समय था जब मेडिकल कॉलेज में पांच घंटे लाइब्रेरी खुलती थी अब सभी मेडिकल कॉलेजों में 14 घंटे खोलने के निर्देश हैं। ई-ग्रंथालय की सुविधा भी शुरू की है। चॉइस बेस्ड कैंटीन, खेलकूद, व्यायाम सहित तमाम इंतजाम किए हैं, ताकि एमबीबीएस करने वालों का सर्वांगीण विकास हो। बच्चों के बीच नियमित जाता हूं, उनसे फीडबैक लेता हूं। जितना संभव होगा हम मेडिकल छात्रों के लिए करेंगे।

मोहम्मदी एसडीएम को ज्ञापन सौंपते किसान नेता।

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