नगर पंचायत की कार्यशैली पर भी लोग उठा रहे सवाल
औद्योगिक नगरी के नाम से प्रसिद्ध सेलाकुई में प्रतिदिन भारी संख्या में निकलने वाला कचरा क्षेत्र के पर्यावरण के लिए घातक बनता जा रहा है। क्षेत्र के नदी, नालों और खालों में जमा हो रहा कचरा उनके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। नगर पंचायत की कार्यशैली पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं।
उत्तराखंड बनने से पहले सेलाकुई का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण स्थान हुआ करता था। आसन नदी से लेकर क्षेत्र में बहने वाली स्वारना नदी व कई बरसाती नाले-खाले क्षेत्र की खास पहचान हुआ करते थे। लेकिन अब क्षेत्र में कूड़े का अंबार लगा है। नदी, नाले व खाले कूड़े व गंदगी से अटे पड़े हुए हैं। बायखाला और जमनपुर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली आसन नदी में कूड़ा निस्तारण केंद्र से निकलने वाला लीचर्ड जहर की तरह मिल रहा है। इसके अलावा आबादी व औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अजैविक कूड़ा नदी के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है। उधर स्वारना नदी से लेकर क्षेत्र से होकर गुजरने वाले सभी नाले और खाले कूड़े का डंपिंग जोन बन गए हैं।
राज्य आंदोलनकारी शूरवीर सिंह चौहान, कूड़ा निस्तारण केंद्र को हटाने की लड़ाई लड़ रही पछवादून संयुक्त समिति के सचिव राजेंद्र राज गंगसारी का कहना है कि नगर पंचायत को शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र में कूड़ा डालने की छूट मिली हुई है लेकिन बावजूद इसके सेलाकुई में गली मोहल्लों से लेकर चारों तरफ कूड़ा फैला हुआ है। कचरे में मौजूद पॉलिथीन, प्लास्टिक व रसायनिक पदार्थों से नदी, नालों और खालों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन पर भी सवाल उठाए। कहा कि इसी प्रकार की स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में नदी-नाले समाप्त हो जाएंगे।
बयान...
नगर पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के साथ नदी, नालों और खालों में कूड़ा डालने वालों पर सख्ती की जाएगी। इसके अलावा नदी, नालों और खालों में जमा कूड़े के संबंध में जिला प्रशासन से बात करके आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - एमएल शाह, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, सेलाकुई