देहरादून में मोहर्रम की दसवीं तारीख को करबला के शहीदों की याद में श्रद्धालुओं ने छुरियों का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।
मन्नत उतारी गई
छोटे-छोटे बच्चों के सिर पर भी कमां लगाकर मन्नत उतारी गई। अंजुमन मोइनुल मोमनीन के बैनर तले शुक्रवार दोपहर दर्शनलाल चौक से ताजिया का जुलूस निकाला गया। इस मौके पर श्रद्धालु नोहाख्वानी और मातम करते रहे।
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श्रद्धालु ‘शियों के सरदार हुसैन अलविदा-दीन के मुख्तार हुसैन अलविदा’ पढ़ते हुए इनामुल्लाह बिल्डिंग आए। यहां पर भी लोगों ने मातम और नोहाख्वानी की। एक साल के अंदर की उम्र के तीन बच्चों को मन्नती कमां लगाई गई। आज दसवीं मोहर्रम को सुबह से इमाम बारगाहों और घरों में मजलिस का सिलसिला शुरु हो गया था।
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लोगों ने इमाम आली मकाम और करबला के शहीदों की फातिहा दिलाई। लंगर किया। हसन जैदी ने बताया कि 21 नवंबर से इंदर रोड स्थित इमाम बारगाह में 10 दिन तक मजलिस होगी। मजलिस को लखनऊ के मौलाना आजम हुसैन और मुंबई के मौलाना शाहिद हुसैन खिताब करेंगे। जुलूस में एसएम अली हसनैन, मौलाना मोहम्मद असगर, कमर जैदी आदि रहे।
शाम-ए-गरीबां मनाई
दसवीं मोहर्रम को सूरज डूबने के बाद इंदर रोड और इनामुल्लाह बिल्डिंग स्थित इमाम बारगाह में शाम-ए-गरीबां मनाई गईं। इस कार्यक्रम में इमाम आली मकाम और उनके 72 साथियों की शहादत के बाद करबला का दृश्य प्रस्तुत किया गया। घुप अंधरे में एक व्यक्ति थाल पर चिराग और कुछ खाने के सामान रखे दाखिल हुआ। यजीदी जुल्म को याद करके श्रद्धालु फूट-फूटकर रो पड़े।
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