रजिस्ट्री फर्जीवाड़े के कई मामलों में मुद्दई और गवाह दोनों के सुर बदलने लगे हैं। इनके बदले हुए सुरों से एसआईटी से लेकर पुलिस तक परेशान है। एक के बाद एक इस तरह के चार मामले आ चुके हैं, जिसमें शिकायतकर्ता और गवाह दोनों ही पक्षों ने अपने बयानों को बदलने की अर्जी लगाई है। कल तक गलत दस्तावेजों के आधार पर जमीन कब्जाने या फिर बेचने के आरोप लगाने वाले शिकायतकर्ता अचानक क्यों बदल गए? इसे लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
रजिस्ट्री फर्जीवाड़े के तार बेहद गहरे हैं। इसके तार कहां-कहां किन लोगों से जुड़े हैं, यह पूरी तरह पता नहीं लगाया जा सका है। एसआईटी की जांच अपने अंतिम चरण में है। इससे पहले कि जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाए, शिकायतकर्ता व गवाह मुकरने लगे हैं। बाकायदा प्रार्थनापत्र लगाया जा रहा है, उसमें कहा गया है कि पहले जो बयान उन लोगों ने दर्ज कराए थे, वह भ्रमवश या धोखे में दर्ज करा दिए थे। जांच समिति से गवाह मांग कर रहे हैं कि उनके नए बयान दर्ज कराए जाएं, वहीं शिकायतकर्ता अपनी शिकायत वापस लेने की भी गुहार लगा रहे हैं। इसके कई मायने हैं, जिन्हें जांच समिति भी बखूबी समझ रही है। ऐसे मामलों पर समिति की पैनी नजर है।