अमर उजाला फाउंडेशन ने बुधवार को पछवादून गढ़वाल सभा के सहयोग से ‘नई पीढ़ी को नशे से कैसे बचाएं’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। नशा मुक्त शहर के लिए बुद्धिजीवियों और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने जागरूकता और एक्शन पर जोर दिया। कहा कि आज के दौर में बच्चों को नशा से दूर रखने के लिए अभिभावकों को उनको समय देना जरूरी है। बच्चों को योग, खेलकूद और अध्यात्म से जोड़कर उन्हें नशे के मकड़जाल से बचाया जा सकता है।
दिनकर विहार स्थित पछवादून गढ़वाल सभा के भवन में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकार, शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी और पुलिस अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। वरिष्ठ उपनिरीक्षक संजीत कुमार ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की युवा पीढ़ी आज बुरी तरह से नशे की जद में है। कहा कि लोग अपनी कॉलोनियों और मोहल्लों में नशा बेचने वाले लोगों को जागरूक करें। अगर वो नहीं मानते तो पुलिस को बताएं। कहा कि जागरूकता और एक्शन से नशे की बिक्री, खरीद पर रोक लग सकती है।
संस्था के सचिव सुमन मोहन ममगाई ने कहा कि अगर पराधीनता के समय युवा नशे की गिरफ्त होते तो देश आजाद नहीं होता। सेवानिवृत अधिकारी त्रिलोक सिंह रावत ने कहा कि योग और अध्यात्म से जोड़कर बच्चों को नशे से दूर रखा जा सकता है। राजनीतिक दल से जुड़े विकास शर्मा ने कहा कि पुलिस को नशे पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
साहित्यकार डॉ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी ने कहा कि योग, अध्यात्म और खेल गतिविधियों से जोड़कर बच्चों को नशे से दूर रखा जाता है। बच्चों को माता पिता और गुरुजनों का महत्व समझाते हुए उनको नैतिक ज्ञान देना भी जरूरी है। साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी कहा कि बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए हमें अपने घर से शुरूआत करनी होगी। संस्था के अध्यक्ष राजू बिंजोला ने कहा कि अभिभावक अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए बच्चों को जागरूक करें। पुलिस भी गली-मोहल्लों में नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करे तो शहर नशा मुक्त होगा। संवाद कार्यक्रम 40 लोगों ने प्रतिभाग किया।
इस दौरान वरिष्ठ उपनिरीक्षक नीमा रावत, टीएस रावत, निवर्तमान सभासद गुड्डी देवी, पूर्व सभासद सविता ध्यानी, दरबान सिंह रावत, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, आलम सिंह बिष्ट, नवनीत बिजल्वाण आदि उपस्थित रहे।