शैली खत के दोहा गांव में 50 लाख की लागत से चालदा महाराज के भव्य मंदिर का निर्माण हो गया है। खत के 25 गांवों के लोग 12 साल से मंदिर का निर्माण कर रहे थे। अब इसी मंदिर में 150 साल बाद चालदा महाराज विराजमान होंगे। देव दर्शन की घड़ी पास होने से खतवासी उत्साहित हैं। मंदिर के निर्माण के बाद खतवासी देवता के आगमन की व्यवस्था और देव दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के भंडारे आदि की व्यवस्थाओं में लग गए हैं।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में 39 खत हैं। इनमें से चालदा महासू देवता 24 खतों में प्रवास के लिए जाते हैं। इनमें उपरली और निचली खत होती है। उपरली खत में छत्रधारी चालदा महासू देवता हिमाचल और हनोल होते हुए आते हैं। देवता इस समय दसऊ गांव में विराजमान हैं। थैना से चलने वाले छत्रधारी चालदा महासू देवता इस समय घणता गांव स्थित मंदिर में विराजमान हैं। शुभ मुहूर्त के अनुसार देवता ने 16 जून को खत शैली के दोहा गांव स्थित मंदिर में आने का समय दे दिया है। करीब 150 साल के लंबे इंतजार के बाद दोहा गांव में बने नवनिर्मित मंदिर में विराजमान होंगे। खत वासियों ने अपने ईष्ट देव बौठा महासू के साथ-साथ क्षेत्र के अराध्य देव छत्रधारी चालदा महासू देवता का भी नया मंदिर बनाया है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर, सचिव राजेंद्र सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष दिनेश चौहान आदि लोगों ने बताया कि खत में दोहा, झूसोऊ, मटियावा, दोऊ, ककनोई, शिसोई, बढौडा, मलोऊ, खोखटी, डागूरा, कुन्ना, टिपराड, बजोऊ, रताड, संवाई, माख्टी, क्यावा, नगोऊ, छठोऊ, कुनावा, हय्यौ, टगरी, शिबोऊ, कैत्री, घिंघोऊ आदि 25 गांव आते हैं। जिनके लिए देवता का खत में होना ऐतिहासिक पल होगा।