एडवोकेट इमरान और केपी करते थे टी-स्टेट की खाली जमीनों के कागज तैयार
इमरान में इमरान ने पुलिस को बताया कि अन्य सहयोगियों के माध्यम से उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी केपी सिंह (कुंवरपाल सिंह) से हुई थी। इमरान रजिस्ट्रार कार्यालय में नियुक्त अजय के साथ मिलकर खाली पड़ीं विवादित जमीनों के कागजात जिल्द फाइलों से निकालकर केपी सिंह को देता था। इसके बाद केपी सिंह अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उन कागजातों की फर्जी रजिस्ट्रियां बनाकर उनकी प्रतियां उन्हीं फाइलों में अजय के माध्यम से लगवा देते थे।
अजय ने बताया कि वह केपी सिंह के संपर्क में काफी समय से था। केपी ने उसे लालच दिया था, जिसके कारण वह रिकॉर्ड रूम से बरसों पुरानी जिल्द फाइलों से निकालकर उन्हें देता था और फिर फर्जी जिल्द उन फाइलों में लगा देता था। इसके बाद केपी, इमरान व उसके अन्य सहयोगी संबंधित भूमियों पर कब्जा कर विभिन्न प्रॉपर्टी डीलरों के माध्यम से बेच देते थे। जिसका मुनाफा वे आपस में बांट लेते थे।
आरोपियों ने जमीन बेचकर कमाया 15 करोड़ से अधिक का मुनाफा
पुलिस जांच में सामने आया कि बाइंडर अजय ने वर्ष 1984-85 व वर्ष 1980 की जिल्द फाइलों में से ऐसे कागजात जो लोन, लीज, किरायेनामा आदि से संबंधित थे, फाइलों से निकालकर केपी सिंह को दिए। जिसके बाद आरोपियों ने रिंग रोड, रानीपोखरी, नवादा आदि की जमीनों की अपने आदमियों के नाम पर फर्जी रजिस्ट्रियां कर दस्तावेज तैयार किए। इस खेल में उन्होंने लगभग 15 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया।
अजय को दिया था 45 लाख का प्लॉट व 15 लाख रुपये
केपी सिंह ने इस काम के लिए अजय क्षेत्री को रिंग रोड पर करीब 45 लाख का 166 गज का एक प्लाॅट दिया था। इसके साथ ही 15 लाख की आर्थिक मदद भी की थी। पुलिस ने अजय के कब्जे से रिंग रोड पर खसरा नंबर 1584 रकबा 166 गज भूमि प्लॉट की रजिस्ट्री व उसके बैंक अकाउंट की पासबुक बरामद की है। पासबुक में लाखों रुपये की लेनदेन मिली है।
केपी सिंह और अन्य की तलाश में पुलिस दे रही दबिश
पुलिस के अनुसार इस मामले में केपी सिंह के अलावा अन्य कई लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।