यह सेवा अल्प काल के लिए होती थी जिसकी उस वक्त अधिकतम अवधि 10 साल की थी। महिलाओं ने इसके प्रति आवाज उठाई तो इस सेवा को चार साल के लिए और बढ़ा दिया गया। बावजूद इसके महिलाओं की सेना में स्थायी कमीशन की मांग जारी रही। महिलाएं इसके लिए निचली अदालतों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। वर्ष 2020 में सर्वोच्च अदालत का ऐतिहासिक फैसला आया जिसमें महिलाओं को पूर्ण कालिक अफसर बनने की अनुमति दी गई।
देश की जांबाज लड़कियों ने भी पूर्व के इन संघर्षों को याद किया और वर्ष 2022 में महिलाओं का पहला बैच एनडीए में दाखिल हो गया। वहां तीन साल ग्रेजुएशन करने के बाद नौ महिला कैडेट्स का चयन देहरादून की प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी में हुआ। एक साल के कठिन प्रशिक्षण के बाद इन नौ महिलाओं ने अब शनिवार को पूर्णकालिक अफसर बन देश की सरहदों की रक्षा की शपथ के साथ आईएमए से थल सेना की सेवा की ओर पहला कदम बढ़ा दिया।