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IMA POP: ट्रेनिंग के दौरान खोए माता-पिता, नहीं टूटा हौसला, चुनौतियों को पार कर इन कैडेट्स ने पाई अफसर की वर्दी

Sat, 13 Jun 2026 09:27 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

 किसी कैडेट ने ट्रेनिंग के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया, किसी ने पिता का साया न होने के बावजूद सेना का अधिकारी बनने का सपना पूरा किया, तो किसी ने अपने परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया। कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच युवा कैडेट्स ने हार नहीं मानी और आखिरकार भारतीय सेना में अधिकारी बनकर अपने परिवार और देश का नाम रोशन किया।
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सेना में अधिकारी बने गुलशन मार्डी  और प्रथम कुमार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आईएमए में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर सेना के अधिकारी बने गुलशन मार्डी जमशेदपुर, झारखंड के रहने वाले हैं। वे झारखंड के जनजाति समुदाय से हैं। 2022 में आईएमए में उनका चयन हुआ था। लेकिन ट्रेनिंग शुरू होने के एक साल बाद ही उनके पिता की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद मां अवसाद में चली गईं और दो साल बाद उनकी मां भी चल बसीं।\

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माता-पिता की मौत भी गुलशन मार्डी के हौसले को तोड़ नहीं सकी और आज वे सेना के उच्च अधिकारी बनकर निकले हैं। गुलशन मार्डी की बहन ने अमर उजाला को बताया कि उनके पिता भी सेना में हवलदार थे। वे बेटे को सेना का बड़ा अफसर बनते हुए देखना चाहते थे। जब गुलशन का आईएमए में चयन हुआ था, वे बहुत खुश थे। लेकिन एक बीमारी के कारण उनका निधन हो गया।

इस सदमे को मां नहीं सह सकीं और दो साल के अंदर उनका भी निधन हो गया। मां-बाप की मौत के बाद उन सबने गुलशन मार्डी को अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए प्रेरित किया। स्वयं मार्डी हर हाल में अपने पिता का सपना पूरा करना चाहते थे। उनके इसी जज्बे का परिणाम है कि आज वे सेना के उच्च अधिकारी बनने में सफल हुए।

सेना के अधिकारियों की पिता से दोस्ती से निकला अधिकारी बनने का सपना

मूलरूप से पटना, बिहार के रहने वाले प्रथम कुमार आईएमए की ट्रेनिंग पूरी कर अधिकारी बने हैं। उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई। उनके पिता राजेश कुमार एक निजी कंपनी में काम करते हैं। राजेश कुमार ने बताया कि उनके कई दोस्त सेना के अधिकारी हैं। पारिवारिक कार्यक्रमों में उनके दोस्त आते-जाते थे। उन्हें देखकर ही प्रथम कुमार के मन में सेना का अफसर बनने की इच्छा पैदा हुई।उन्होंने बताया कि प्रथम कुमार पढ़ने के मामले में बहुत अच्छे हैं और उन सबने उन्हें कई बेहतर करियर के बारे में बताया, लेकिन प्रथम कुमार के मन में केवल सेना का अधिकारी बनने का सपना पलता रहा। उसी का परिणाम है कि आज वे आईएमए में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर सेना के अधिकारी बनने में सफल हुए हैं। राजेश कुमार ने बताया कि प्रथम कुमार उनके परिवार के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो सेना में गए हैं। लेकिन वे चाहेंगे कि आने वाले समय में उनके परिवार के ज्यादा से ज्यादा लोग सेना में जाएं और देश की सेवा करें।

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कैडेट कैलाश शर्मा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बेटे को अफसर बनते देख पिता की आंखों में आए आंसू

अलीगढ़ के पीपलीगांव के रहने वाले जेंटलमैन कैडेट कैलाश शर्मा आज अपने दोस्तों के बीच आदर्श बन चुके हैं। वे उन चंद युवाओं में शामिल हो गए हैं जो सेना का अधिकारी बनने का सपना देखते हैं और उसे पूरा कर पाते हैं। कैलाश शर्मा के पिता महिपाल शर्मा स्वयं भी सेना में हवलदार रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैलाश उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी से हैं जो सेना में जाकर देश की सेवा करने का सपना साकार करने में सफल हुए हैं।

बेटे कैलाश शर्मा को अफसर बनते देख पिता महिपाल शर्मा की आंखों में आंसू आ गए। अपना आंसू पोछते हुए उन्होंने कहा कि सेना के अधिकारी की वर्दी में देखकर उनका जी भर आया। उनकी मां ने बताया कि कैलाश शर्मा ने आईएमए में जाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की थी और आज उसका सपना साकार हुआ।

शिक्षिका मां का सपना हुआ साकार, बेटा बना सेना का बड़ा अफसर

सेना के अफसर बने करन पांडे ऊधमसिंह नगर के रहने वाले हैं। उनके पिता दिनेश शर्मा एक निजी कंपनी में अधिकारी हैं। उनकी मां रंजीता पांडे एक शिक्षिका थीं। दो वर्ष पहले ही उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। करन पांडेय ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। उनके आवास के पास कुमाऊं रेजीमेंट का मुख्य कार्यालय है। इस मुख्यालय में लगातार सेना से जुड़ी गतिविधियां होती रहती हैं। इसे देखकर करन के मन में सेना में जाने का सपना पलने लगा।

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उनके पिता दिनेश शर्मा ने बताया कि करन की शिक्षा को मजबूत करने में उनकी मां की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण रही और उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज करन सेना के उच्च अधि्कारी बनने में सफल हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में अब तक कोई सेना से जुड़ा नहीं रहा है, लेकिन करन के नाना सेना में रह चुके हैं। संभवतः उन्हें देखकर ही मां रंजीता पांडे के मन में यह चाहत थी कि उनका बेटा सेना का बड़ा अधिकारी बने। उन्होंने कहा कि आज करन की मां का सपना साकार हुआ।

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