परिनव कहते हैं कि आज हमारे साथ ही पूरा परिवार खुश है कि हम दोनों आर्मी में उस जगह पहुंच गये हैं, जिसका सपना हम देखा करते थे। बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें वीरता की कहानियां प्रेरित करती थी।
अभिनव के साथ ही ऐसा ही था। हम दोनों ने अमृतसर से 12वीं तक की पढ़ाई की। हम दोनों ने 10वीं और 12वीं में जहां 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। वहीं, बीटेक भी 80 से अधिक प्रतिशत के साथ पास किया। जून 2018 में आईएमए में टेक्निकल इंट्री हुई। आज अफसर बनकर अच्छा लग रहा है। अभिनव से दो मिनट बड़े परिनव कहते हैं कि हमने बचपन में ही तय कर लिया था कि फौज में जाना है।
परिनव और अभिनव पाठक कहते हैं कि पिता अशोक कुमार ट्रांसपोर्टर है। माता मंजू गृहणी हैं। दोनों ने हमें छोटे से पूरा सपोर्ट किया। शायद यही वजह है कि हम अपना सपना पूरा करने में सफल हो सके।
हीं, पिता अशोक और माता मंजू बेटे के अफसर बनने से काफी गदगद दिखे। उनका कहना था कि बच्चों के साथ ही उनका सपना भी पूरा हो गया है।