इसके बाद उनके बेटे हवलदार रामलाल ने इस परंपरा को कायम रखा। सिलसिला यहीं नहीं थमा रामलाल के बेटे अमर सिंह ने भी अपने पिता और दादा की तरह सेना को ही अपना ठिकाना माना और सैनिक के रूप में भर्ती हुए।
इसके बाद अमर सिंह के चार बेटे हुए, जिन्होंने भारत की सेनाओं को ही चुना। बड़ा बेटा प्रकाश सिंह ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। जबकि रमेश सिंह सूबेदार और अजय सिंह एयरफोर्स में मास्टर वारेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
सबसे छोटे भाई हैं विजय सिंह जो खुद थल सेना के हवलदार पद से रिटायर्ड हुए और शनिवार को उनका ही बेटा है मनदीप जो अपने परिवार का पहला सैन्य अफसर बना है। सिंह परिवार का मूल काम खेती किसानी है और गांव के बड़े किसानों में इनकी गिनती होती है।
झज्जर के मनोज को मिला पैरा मैडल
हरियाणा के झज्जर शहर के वायु सेना के पूर्व सार्जेंट हंसराज डागर के बेटे मनोज डागर भी सेना के अफसर बन गए। मनोज डागर ने अपनी पैरा कंपनी में बेस्ट कैडेट्स के तौर पर भी खुद को साबित किया। उन्हें पैरा मेडल इन बेस्ट फिजिकल अवार्ड से नवाजा गया। मनोज डागर बताते हैं कि उनका परिवार हमेशा से बेहतर करता आया है और आगे भविष्य में वे भी सेना को अपना बेहतर ही देंगे।