ऊधमसिंह नगर के सितारगंज निवासी मनोरथ भट्ट का बेटा गौरव भट्ट सेना में अफसर बन गया। इसकी खुशी मनोरथ भट्ट के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। मनोरथ भट्ट सितारगंज चीनी मिल में काम करते हैं। बीते चार मार्च को चीनी मिल बंद कर दी गई थी। इसके बाद मनोरथ भट्ट ने बड़ी मेहनत कर बेटे की पढ़ाई कराई, आज बेटे ने सेना में भर्ती होकर उन्हें गर्व से भर दिया है। मां कला भट्ट बताती हैं कि गौरव बचपन से ही मेधावी था। उसने 12वीं पास करने के बाद ही तय कर लिया था कि सेना में जाना है। उसका और हमारा सपना आज पूरा हो गया।
अफसर बने अमोल ने रोशन किया परिवार नाम
अल्मोड़ा निवासी अमोल मेहता ने शनिवार को सेना में अफसर बनकर परिवार का नाम रोशन किया। अमोल ने कहा कि आज का दिन उनके लिए बेहद खास है। उनका सपना आज पूरा हो गया। पिता यूसीएस मेहता और माता विनीता ने बताया कि उनके बेटे का देश की सेना में चयन गौरव की बात है।
बागेश्वर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का बेटा बना अफसर
बागेश्वर जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भगत सिंह भौर्याल का बेटा चेतन भौर्याल सेना में अफसर बन गया है। शनिवार को हुई आईएमए की पासिंग आउट परेड से पासआउट होने के इन लम्हों को देखने के लिए उनका परिवार भी मौजूद रहा। चेतन भौर्याल ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से 12वीं पास की। यहीं से उन्हें सेना में जाने का माहौल मिला। 12वीं के बाद एनडीए परीक्षा पास की और एनडीए में भर्ती हो गए। ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने आईएमए में एंट्री पाई। उनकी मां गीता भौर्याल ने खुशी से बेटे का माथ चूम लिया। चेतन का एक भाई मोहित भौर्याल इंजीनियर है। उन्होंने बताया कि वह परिवार के पहले सैन्य अधिकारी हैं।
पिथौरागढ़ का अक्षय भट्ट बना सेना में अफसर
पिथौरागढ़ का अक्षय भट्ट सेना में अफसर बन गया है। वह आईएमए से पासआउट होकर अफसर बनने वाले परिवार के तीसरी पीढ़ी के अफसर हैं। इससे पहले उनके दादा, पिता और चाचा सेना में अफसर रह चुके हैं।
पिथौरागढ़ के ग्राम रिखांई पोस्ट सिमलकोट निवासी अक्षय भट्ट ने परिवार की सैन्य परंपराओं को आगे बढ़ाया। उनके दादा पीतांबर दत्त ईएमई कोर से रिटायर्ड हैं। उनके पिता ईश्वरी दत्त कुमाऊं रेजीमेंट से नायक पद से रिटायर्ड हैं। उनके चाचा अक्षय भट्ट 57 आर्म्ड रेजीमेंट में पोस्टेड हैं। दादा, पिता, चाचा की राह पर चलते हुए शनिवार को अक्षय भट्ट भी सेना में अफसर बन गया। उनकी शिक्षा जनरल जोशी पब्लिक स्कूल से हुई है। इसके बाद उन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल चंडीगढ़ से शिक्षा हासिल की। एनडीए से उन्होंने सेना में एंट्री पाई।
देश की सेना का हिस्सा बनने के लिए इसे दीपक की दीवानगी ही कहेंगे, जो उन्होंने 12 लाख रुपये सालाना का पैकेज छोड़ दिया। जी हां, नैनीताल जिले के लालकुआं स्थित बिंदुखत्ता निवासी दीपक सिंह बिष्ट ने ऐसी ही मिसाल कायम कर पिता और परिवार का नाम रोशन किया है। दीपक ने बीटेक की पढ़ाई की और दो साल तक भारत पेट्रोलियम में बतौर टेक्निकल इंजीनियर काम किया।
दीपक के पिता प्रताप सिंह बिष्ट चार असम राइफल्स में हवलदार हैं। वर्तमान में वे मणिपुर (नागालैंड) में तैनात हैं। प्रताप सिंह बिष्ट बताते हैं कि बचपन से ही दीपक फौज में जाने का जज्बा रखता था। जब भी मौका मिलता, वह मेरी वर्दी पहनकर घूमता और कहता था कि मुझे सैल्यूट करिए। आज सच में उसे सैल्यूट मारने का मन कर रहा है।
दीपक ने बीटेक की पढ़ाई पूरी करने का बाद वर्ष 2014 में मुंबई स्थित भारत पेट्रोलियम में 12 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी कर ली। दीपक के अनुसार दो साल तक नौकरी तो की, लेकिन मन सेना में जाने के लिए उफान मारता रहा। इसके चलते नौकरी छोड़कर बचपन के सपने को पूरा करने में जुट गया। वर्ष 2017 में टेक्निकल ग्रेजुएट कमीशन के जरिये भर्ती हुआ और आज अफसर बनने का सपना साकार हो गया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पिता प्रताप व माता शांति को दिया। दीपक के दादा मोहन सिंह भी सेना में थे।
वैसे तो आईएमए में होने वाली पासिंग आउट परेड (पीओपी) हर परिवार के लिए खास होती है, लेकिन इस बार की पीओपी में एक परिवार के तीन युवा खास रहे। जो सेना के तीनों अंगों में देश की सेवा कर रहे हैं।
पौड़ी के एक परिवार के लिए शनिवार को आईएमए में हुई पीओपी (पासिंग आउट परेड) खास रही। बीएसएफ में कमांडेंट महाबीर प्रसाद के चेहरे की खुशी खुद इस बात का पुष्टि कर रही थी। बड़े बेटे अमित (नेवी में लेफ्टिनेंट), सबसे छोेटे बेटे सानंद (पुणे में एयरफोर्स की ट्रेनिंग) के बाद अब शनिवार को आईएमए में हुई पीओपी में मझले बेटे सुब्रह्म के अफसर बनने से महाबीर प्रसाद का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। अमित वर्तमान में विशाखापट्टनम में तैनात है। छोेटे बेटा सानंद पुणे में एयरफोर्स की ट्रेनिंग ले रहा है और बीएसएफ में कमांडेंट महाबीर ग्वालियर में तैनात हैं। माता विराज बताती हैं कि सुब्रह्म की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय हल्द्वानी में हुई है। तीनों बेटों का सेना में जाना गर्व की बात है।
सुब्रह्म बताते हैं कि उन्होंने बचपन में बॉर्डर फिल्म देखी थी। उसे देखकर मैंने निर्णय लिया कि मुझे भी फौज में ही जाना है। पिता बीएसएफ में थे। बड़ा भाई नेवी में होने के कारण कहीं न कहीं घर-परिवार का माहौल भी वैसा ही रहा। पिता ने बचपन से अनुशासन में रहना सिखाया और आज सेना में शामिल होने का सपना पूरा हो गया। अब अगला लक्ष्य जिम्मेदारी से देश की सेवा करना है। सुब्रह्म के अनुसार युवाओं को सेना में भर्ती होकर देश सेवा में योगदान देना चाहिए।