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सचिवालय संघ के चुनाव पर विवाद का साया, बिना शुल्क दिए वोटर लिस्ट में शामिल सदस्य

Sun, 12 Aug 2018 10:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड सचिवालय संघ के चुनाव में 101 ऐसे सदस्यों ने मतदान किया, जो वैध मतदाता थे ही नहीं। संघ के हालिया चुनाव में हार का मुंह देखने वाले पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद रतूड़ी ने संघ की सदस्यता शुल्क में गड़बड़ी सामने आने के बाद शनिवार को यह आरोप लगाया है। उनके मुताबिक अंतिम मतदाता सूची में जोड़े गए इन 101 सदस्यों ने सदस्यता शुल्क जमा ही नहीं किया। ना तो उनके द्वारा जमा कराए गए शुल्क का पता चल रहा है, न ही सदस्यता शुल्क की पर्चियों का। 

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यदि वाकई ऐसा है तो संघ के नियमों के मुताबिक ऐसे सदस्य मतदान के लिए अयोग्य हैं। यानी मामला अदालत पहुंचा तो वर्तमान पदाधिकारियों की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। पूर्व अध्यक्ष  रतूड़ी, इस कथित घपले को लेकर मुखर हो गए हैं। वह कहते हैं कि वह यह मामला सचिवालय प्रशासन के सामने ले जाएंगे, अगर न्याय नहीं मिला तो कोर्ट जाने का विकल्प भी खुला है। रतूड़ी का कहना है कि यह बड़ा सवाल है कि आखिर जिन सदस्यों ने शुल्क ही नहीं दिया, उनके नाम मतदाता सूची में कैसे दर्ज हो गए ? रतूड़ी ही नहीं संघ से जुड़े कुछ अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी आशंका जाहिर कर रहे हैं कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए बगैर शुल्क लिए सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट में चढ़ाए गए।  इसलिए यह जांच का विषय है। खबर है कि इस मामले को अब सचिव सचिवालय प्रशासन के समक्ष ले जाने की तैयारी है, ताकि अपर सचिव (न्याय) के स्तर से इस पूरे प्रकरण की जांच हो सके। 

कर्मचारी संगठनों के लिहाज से प्रदेश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित माने जाने वाले उत्तराखंड सचिवालय संघ के आठ जून 2018 को हुए चुनाव में दीपक जोशी अध्यक्ष चुने गए थे। वह इससे पहले भी अध्यक्ष थे। पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद रतूूड़ी इस चुनाव में 62 मतों से पराजित हुए थे। इस चुनाव में  कथित गड़बड़ी के संकेत उस वक्त मिले, जब  संघ के पिछले सत्र के ऑडिटर अनिल कुमार उनियाल ने वर्तमान अध्यक्ष और महासचिव राकेश जोशी को एक पत्र लिखा कि संघ के बैंक खाते में गड़बड़ी है। इसके बाद संघ के महासचिव ने तत्कालीन अध्यक्ष दीपक जोशी, तत्कालीन महासचिव प्रदीप पपनै और तत्कालीन कोषाध्यक्ष अजय कुमार को नोटिस दिया। इस पर कोषाध्यक्ष ने जवाब दिया कि हमने 101 सदस्यों का मतदाता सूची में नाम दर्ज करा दिया था, मगर उनसे शुल्क नहीं मिला था। इस खोजबीन में यह भी सामने आया कि संघ के खाते से बड़ी रकम गायब है। 
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सचिवालय कर्मचारी कल्याण कोष के खाते में सदस्यता शुल्क के रूप में ली गई धनराशि जमा नहीं हुई। यह गंभीर अनियमितता प्रतीत हो रही है। तत्कालीन पदाधिकारियों को नोटिस भेज दिए गए हैं। हिसाब-किताब स्पष्ट नहीं हुआ तो मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
- राकेश जोशी, महासचिव, उत्तराखंड सचिवालय संघ

अंतिम मतदाता सूची में जिन 101 सदस्यों के नाम जोड़े गए, उनके रसीद नंबर मुझे दिखाए गए, उसके बाद ही उन्हें मतदान का अधिकार दिया गया। यह मामला अब संघ के स्तर का है।
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- मस्तू दास, सचिवालय संघ के चुनाव अधिकारी

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