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उबर की तरह उत्तराखंड में चल रही हजारों अवैध टैक्सियां

Sun, 14 Dec 2014 12:35 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
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उत्तराखंड के सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थलों में एक और कुमाऊं की शान नैनीताल है। यहां टैक्सी चालन बड़ा व्यवसाय है, पर इन टैक्सियों को चलाने वालों की नियमित जांच की कोई गंभीर प्रणाली विकसित की गई और न ही कोई एहतियात बरती गई।
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उबर रेप कांड ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान सुरक्षा को लेकर खींचा है। पर उत्तराखंड में स्थिति यह है कि कुमाऊं में ही 1000 अवैध टैक्सियां चल रही हैं। इन्हें चलाने वाला कौन है, वाहन स्वामी कौन है? इसका तो पता तक नहीं है।

आरटीओ विभाग में नैनीताल जिले की पंजीकृत चार हजार टैक्सियों में केवल 160 टैक्सियों के ड्राइवरों के सत्यापन या डिटेल के जुड़े कागजात पुलिस के पास है। यह पहल भी कोई सरकारी महकमे द्वारा नहीं बल्कि टैक्सी एसो. की तरफ से की गई है।
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नैनीताल जिले में 4000 टैक्सियों के संचालन का परमिट मिला है, पर इसकी तुलना में ऊधम सिंह नगर जिले में करीब चार सौ ही टैक्सियों के परमिट है। परिवहन सूत्रों के अनुसार इसमें बड़े पैमाने पर अवैध ढंग से निजी वाहनों को टैक्सी बनाकर संचालित किया जाता है।

एक अनुमान के मुताबिक कुमाऊं में इसी तरह करीब एक हजार अवैध टैक्सियां दौड़ रही हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसके अलावा जो टैक्सियां चल भी रही हैं, उसमें अधिकांश ड्राइवरों का सत्यापन तक नहीं है।

परिवहन विभाग कामर्शियल वाहन चालकों का लाइसेंस नवीनीकरण के लिए रिफ्रेशर कोर्स कराता है, पर चालक के अपराध से जुड़ी कोई जानकारी, हलफनामा आदि नहीं लेता है।

केवल हल्द्वानी और नैनीताल एसो. ने 160 ड्राइवरों से जुड़ी जानकारी जुटाई है। जबकि कुमाऊं में करीब 7000 हजार टैक्सियां रजिस्ट्रर्ड हैं।

ड्राइवरों की सुरक्षा भी खतरे में

ड्राइवर भी असुरक्षित हैं। हल्द्वानी से कई टैक्सियां बुक कराकर ले जाने के बाद अपराधियों ने ड्राइवरों को नुकसान पहुंचाकर टैक्सी लूट ली थी। बाद में टैक्सी एसो. की तरफ से ऐहतियातन यात्रियों की डिटेल एकत्र की जाने लगी।

सुरक्षा की दृष्टि से बस अड्डे, टैक्सी स्टैंड पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात थी, जिससे स्वत: ही यात्रियों, ड्राइवर आदि का ब्यौरा रिकॉर्ड होता रहा, पर यह अब तक नहीं हो सका है। किसी भी वाहन में जीपीएस भी नहीं है।
 
फिटनेस में क्यों नहीं होती जांच
वाहन पर रेट लिस्ट, गति सीमा से लेकर शिकायत दर्ज कराने वाला नंबर दर्ज होना चाहिए। पर अधिकांश वाहनों में यह अंकित नहीं होता है। फिटनेस परिवहन कार्यालय में होता है, लेकिन जांच अधिकारी इन बातों को नजरअंदाज करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
 - निजी वाहनों में सवारी करना भारी पड़ सकता है। दुर्घटना होने पर सवारी को इंश्योरेंस आदि का कोई लाभ नहीं मिलेगा। इनमें यात्रा करना जोखिम भरा भी है।
- टैक्सी लेते समय ड्राइवर के लाइसेंस, परमिट और इंश्योरेंस आदि को चेक करें। फोटो स्टेट की भी मांग कर सकते हैं। भुगतान की रसीद जरूर लें।

- ड्राइवर ज्यादा किराया लेता है या बेअदबी करता है तो उसकी शिकायत आरटीओ/एआरटीओ कार्यालय में सादे कागज पर कर सकते हैं।
- अगर अकेले यात्रा कर रहे हैं, तो टैक्सी का नंबर, ड्राइवर का नाम, कहां जा रहे हैं, कब चले हैं, इसकी जानकारी घरवालों को जरूर दें।

- संदेह होने पर निकट के पुलिस चौकी से तत्काल संपर्क करें।
- यात्री और टैक्सी ड्राइवर दोनों मोबाइल और इंटरनेट मौजूद हैं, उससे फोटोग्राफ खींचकर अपने शुभचिंतकों को एहतियातन भेज सकते हैं। इसमें वाह्टसएप ज्यादा व्यवहारिक होगा।
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बाकी जिलों में जगह जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

उत्तराखंड मालिक-चालक कल्याण समिति हल्द्वानी के अध्यक्ष तारा सिंह रौतेला कहते हैं, उनके यहां 80 टैक्सियों का रजिस्ट्रेशन है। समिति ने ड्राइवरों के नाम, पते, फोटो समेत तमाम जानकारी एवं प्रपत्र भोटिया पड़ाव पुलिस को सौंपे हैं।

लालकुआं ट्रक एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष रामबाबू मिश्रा कहते हैं कि ड्राइवरों का सत्यापन पुलिस, आरटीओ के माध्यम से होगा। चंपावत में करीब 310 टैक्सियां हैं। टनकपुर टैक्सी यूनियन अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता का जल्द ड्राइवरों, हेल्परों के सत्यापन को उनसे कागजातों पुलिस को देंगे। पिथौरागढ़ में टैक्सियों की संख्या 1450 है।

हिल ट्रेवल्स टैक्सी यूनियन तथा पिथौरागढ़ टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के लिए अभियान चलाया जाएगा। यूनियन अध्यक्ष त्रिलोक महर और दीपक लुंठी ने बताया कि हर टैक्सी चालक का सत्यापन कर बाकायदा परिचय पत्र भी देंगे।

नैनीताल में टैक्सी चालक मालिक सोसाइटी गोलघर के अध्यक्ष रवि जोशी का कहना है कि  संस्था के माध्यम से लगभग 30 टैक्सियों का संचालन किया जाता है। संस्था से संबद्ध सभी चालकों के पास पूर्व के सत्यापन के प्रमाण है, जिनके आधार पर रिन्यू करने की तैयारी की जा रही है।

टैक्सी चालक मालिक सोसाइटी तल्लीताल के पूर्व अध्यक्ष बबलू बोरा का कहना है संस्था से लगभग 50 टैक्सियां संबद्ध हैं। अधिकांश के फार्म भरकर थाने में दिए जा चुके हैं। एआरटीओ रुद्रपुर में केवल 384 टैक्सी वाहन ही पंजीकृत है, जबकि हकीकत यह है कि जिले में ही करीब डेढ़ हजार से अधिक टैक्सी वाहन चलते हैं।

टैक्सी चालकों की कोई यूनियन नहीं है। एआरटीओ बागेश्वर के अनुसार इस कार्यालय में कुल 1647 टैक्सी वाहन पंजीकृत हैं। बागेश्वर में चार टैक्सी यूनियन हैं। इनके साथ कुल 1594 टैक्सियां जुड़ी हुई हैं।

अल्मोड़ा, रानीखेत की करीब 1300 टैक्सियां एसो. से जुड़ी हैं, पर इनके ड्राइवरों के बारे में जानकारी एसो. के पास नहीं होती है। रामनगर के जिम कार्बेट टैक्सी आपरेटर सोसायटी अध्यक्ष चंदन सिंह के अनुसार 40 ड्राइवरों का सत्यापन की प्रक्रिया चलाई जा रही है।
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