आईआईटी रुड़की के इस शोध का निष्कर्ष प्रतिष्ठित अमेरिकन केमिकल सोसाइटी जर्नल एसीएस इन्फेक्शियश डिजीजेज में प्रकाशित हुआ है। शोध करने वाली टीम में ऋषिकेश एम्स के आशीष कोठारी और बलराम उमर के अलावा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, चंडीगढ़ की वर्षा गुप्ता भी शामिल हैं।
आईआईटी रुड़की के महक सैनी और अमित गौरव भी टीम का हिस्सा हैं। शोध टीम का नेतृत्व करने वाली आईआईटी रुड़की के बायो साइंसेस और बायो इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर रंजना पठानिया ने बताया कि हम अब अणु को एक व्यवहार चिकित्सीय एजेंट के रूप में विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं। आईआईटी के निदेशक प्रो. केके पंत ने बताया कि जल्द ही इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जा सकता है।
ग्राम-पॉजिटिव और निगेटिव बैक्टीरिया पर भी होगा प्रभावी असर
आईआईटी के इस नए मॉलिक्यूल का ग्राम-पॉजिटिव और निगेटिव बैक्टीरिया पर भी प्रभावी असर होगा। फेफड़ों, आंतों, जोड़ों और त्वचा के संक्रमण के अलावा जलने की अवस्था में फैलने वाले संक्रमण में भी यह मॉलिक्यूल अन्य एंटीबैक्टीरियल दवाओं के साथ दिए जाने पर बेहतर परिणाम देगा।