आईआईटी रुड़की में कंप्यूटर में पीएचडी के लिए चयनित होने के बाद सात अभ्यर्थियों की नियुक्ति निरस्त करने के मामले में अब दोबारा से परीक्षा कराने का निर्देश दिया गया है।
इसके तहत आईआईटी में अब 25 और 26 फरवरी को कंप्यूटर में पीएचडी के लिए दोबारा से लिखित और मौखिक परीक्षा कराई जाएगी। इसमें याचिकाकर्ताओं के अलावा अन्य अभ्यर्थी भी प्रतिभाग कर सकेंगे। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आईआईटी प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है।
आईआईटी रुड़की में नवंबर 2016 में पीएचडी के लिए लिखित और मौखिक परीक्षा कराई गई थी। अन्य विभागों के अलावा कंप्यूटर में पीएचडी के लिए करीब 200 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें केवल सात अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। सातों को निर्धारित तिथि पर रजिस्ट्रेशन करने की बात भी कही गई थी।
साथ ही एक शर्त यह भी रखी गई थी कि यदि कोई अभ्यर्थी कहीं नौकरी कर रहा है तो उसे पीएचडी करने के लिए नौकरी छोड़नी होगी। इस संबंध में चयनित अभ्यर्थियों को लिखित और मेल से भी सूचित कर दिया था। तय तिथि पर सातों चयनित अभ्यर्थी जब आईआईटी रुड़की में कंप्यूटर पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे तो उन्हें एडमिशन निरस्त करने की जानकारी दी गई। इसके पीछे तकनीकी खामियों का हवाला दिया गया।
आईआईटी प्रबंधन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बिहार निवासी राहुल कुमार और हरियाणा की आरजू धीमान ने हाईकोर्ट से न्याय की गुहार लगाई थी। दोनों याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई। इस पर हाईकोर्ट ने पहले एक सप्ताह में आईआईटी रुड़की से रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट के आधार पर तत्काल एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर मामले के निस्तारण के निर्देश हाईकोर्ट ने दिए। इसके बाद अब दोबारा से कंप्यूटर में पीएचडी के लिए 25 और 26 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई है।
आईआईटी प्रबंधन पर सवाल
पीएचडी के लिए सात चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति निरस्त के मामले में पहले आईआईटी की ओर से तकनीकी खामी बताई गई थी, लेकिन जब हाईकोर्ट ने आईआईटी प्रबंधन से जवाब तलब किया तो एक शिकायत का हवाला दिया गया। इसमें बताया गया कि किसी लड़की ने शिकायत कर लिखित परीक्षा में सबसे अधिक नंबर और मौखिक में सबसे कम नंबर मिलने की बात कही है। इसके बाद चयन निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा था कि शिकायतकर्ता को आईआईटी प्रोफेसर की पुत्री बताया गया था। खुद को कोर्ट में फंसता देखकर आईआईटी प्रबंधन बैकफुट पर आया और दुबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया।
पीएचडी के लिए इनफोसिस की नौकरी छोड़ी
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाली हरियाणा निवासी आरजू धीमान ने इनफोसिस कंपनी की नौकरी छोड़कर आईआईटी रुड़की से कंप्यूटर में पीएचडी करने का निर्णय लिया था, लेकिन आईआईटी प्रबंधन की ओर से चयन के बाद तकनीकी खामी बताकर पल्ला झाड़ लिया था।
आईआईटी के उपसचिव की सुनिए...
आईआईटी में अकादमी के उपसचिव अजय कुमार शर्मा सब जानते हुए मामले से अंजान नजर आए। जब उनसे इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुझे कुछ जानकारी नहीं है और न ही मैं यह सब बताने के लिए अधिकृत हूं।