पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल के सपनों के भारत का निर्माण करने का सबसे पहला गौरव आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों को प्राप्त हुआ था।
कलाम के विजन-2020 के तहत केंद्र सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग (डीएसटी) के प्रोजेक्ट आईआईटी ने प्रोवाइडिंग अरबन फेसीलिटीज इन रूरल एरिया (पुरा) आधुनिक गांव की तस्वीर पेश की थी। सेटेलाइट डाटा आधारित इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट को संस्थान ने केंद्र सरकार को भेजा था। लेकिन, सरकार इसे धरातल पर नहीं उतार सकी।
आईआईटी रुड़की में 2003 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने बतौर मुख्य अतिथि दीक्षांत समारोह में शिरकत की थी। इस दौरान उनके विजन 2020 पर आईआईटी रुड़की एक प्रोजेक्ट के तहत काम कर रही थी।
आईआईटी के वैज्ञानिक एवं वर्तमान में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय देहरादून में कुलपति के पद पर तैनात डॉ. पीके गर्ग और डा. एसके घोष को डीएसटी इस प्रोजेक्ट में शामिल थे।
डॉ. गर्ग ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत लक्सर ब्लाक क्षेत्र के तहत आने वाले गांवों का चुना गया था। इस प्रोजेक्ट में सेटेलाइट तकनीकी के आधार पर जीआईएस डाटा बेस के जरिए गांवों को विभिन्न सुविधाओं से लैस करना था।
कलाम की पुस्तक पर आधारित था उनका विजन
छह साल पहले इस प्रोजेक्ट को पूरा कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को जमा करा दी गई थी। लेकिन, इसे अमलीजामा पहनाने का काम केंद्र सरकार का था। डॉ. कलाम का यह विजन उनकी पुस्तक ‘इंडिया विजन 2020’ पर आधारित था।
जिसमें ग्रामीण अंचलों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की हिमायत की गई थी। इस पुस्तक में दिए गए विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर जाने माने वैज्ञानिक एवं आईआईटी के पूर्व निदेशक प्रो. इंदरसेन ने विस्तृत अध्ययन करते हुए ब्लाक स्तर पर रूपरेखा तैयार की थी।
यह थी योजना
विजन- 2020 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए चार प्रकार की कनेक्टिविटी को आधार बनाया गया था। जिसे पीक नाम दिया गया था। पी फॉर फिजिकली कनेक्टिविटी, ई फॉर इकोनोमिकल व इलेक्ट्रानिकी कनेक्टिविटी और के फॉर नॉलेज कनेक्टिविटी।
इसके तहत यातायात व्यवस्था, शक्ति, मूलभूत ढांचा, वस्तुओं की उपलब्धता, पर्यटन, रोजगार, आर्थिक मजबूती, बैंक और सहकारी बैंकों की सुविधा, बाजार, सेवा केंद्र, महिला सशक्तिकरण, लघु उद्योग, कंप्यूटर शिक्षा, साइबर कैफे, फैक्स सुविधा, इंटरनेट सुविधा, प्रशिक्षण केंद्र, व्यवसायिक संस्थाएं, स्वास्थ्य एवं पीने के पानी संबंधी योजना आदि की जरूरतों को विकसित करना था।
यह था राष्ट्रपति का रूरल मॉडल
- एक वृत्ताकार मॉडल के तहत आठ से दस गांव को टाऊन से इस प्रकार जोड़ा जाना था कि प्रत्येक गांव की इससे यातायात दूरी एक किलोमीटर हो।
- यह मॉडल शहरों के दस से छह किलोमीटर के आयात में फैले स्वरूप में पूरी तरह विरोध करता था।
- यातायात के लिए केवल एक ही मुख्य मार्ग होना था, जिसमें कहीं भी कोई जंक्शन नहीं था।
- ग्रामीण क्षेत्र की तुलनात्मक रूप से एक छोटी जन संख्या के लिए पूरे यातायात के लिए एक ही मुख्य मार्ग होने के चलते यातायात के ज्यादा संसाधन उपलब्ध कराना।