ज्योतिषाचार्य आचार्य संतोष खंडूड़ी ने बताया कि इन दोनों दिनों में सुबह से लेकर दोपहर तक गोवंश की पूजा की जाती है। मवेशियों के लिए भात, झंगोरा, बाड़ी, मंडुवे आदि से आहार तैयार किया जाता है। जिसे परात में कई तरह के फूलों से सजाया जाता है।
सबसे पहले मवेशियों के पांव धोए जाते हैं और फिर दीप-धूप जलाकर उनकी पूजा की जाती है। माथे पर हल्दी का टीका और सींगों पर सरसों का तेल लगाकर उन्हें परात में सजा अन्न ग्रास दिया जाता है। इसे गोग्रास कहते हैं। बग्वाल और ईगास को घरों में पूड़ी, स्वाली, पकोड़ी, भूड़ा आदि पकवान बनाकर उन सभी परिवारों में बांटे जाते हैं, जिनकी बग्वाल नहीं होती।
लोक संस्कृति के संरक्षण का देंगे संदेश
देवभूमि ईगास महोत्सव संस्था के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत और सह सचिव प्रदीप कुकरेती ने कहा कि ईगास के मौके पर संस्था की ओर से 26 नवंबर को कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। जिससे आने वाली पीढ़ी को उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू किया जा सके।
प्रत्येक उत्तराखंडी मनाए ईगास, अपने घरों में जलाएं दीये : बलूनी
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने प्रत्येक उत्तराखंड वासियों से आग्रह किया है कि वह अपने राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए ईगास (बूढ़ी दीपावली) का त्योहार अवश्य मनाएं। उन्होंने ईगास पर घरों में दिए जलाने की भी अपील की।
राज्य के पहाड़ में मनाए जाने वाले इस पारंपरिक त्योहार को जन-जन के बीच दीपावली, होली व अन्य पर्वों की तरह लोकप्रिय बनाने की मुहिम के तहत सांसद बलूनी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो अपलोड किया है। इस वीडियो के जरिये उन्होंने लोगों से यह अपील की। इसकी शुरुआत उन्होंने दीपावली के दौरान लोक गायिका मीना राणा के ईगास पर आधारित गीत के जरिये किया।
इस वीडियो गीत को उन्होंने अपने फेसबुक पर अपलोड किया। इसके बाद उन्होंने ईगास का एक आकर्षक लोगो भी जारी किया। इसके बाद अब उन्होंने एक वीडियो संदेश के जरिये प्रदेशवासियों को ईगास मनाने का आग्रह किया। उन्होंने लिखा है कि दीपावली के 11वें दिन 25 नवंबर को ईगास या बूढ़ी दिवाली मनाई जाएगी। पिछले साल मैंने कहा था कि ईगास का त्योहार मैं अपने गांव में जाकर मनाऊंगा। दुर्भाग्य से मैं अस्वस्थ हो गया।
मैंने फिर भी देखा कि ईगास का त्योहार बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साह से मनाया। 25 नवंबर को ईगास का त्योहार है। मेरा प्रत्येक उत्तराखंड वासी से आग्रह है कि वह अपने उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए ईगास का त्योहार मनाएं। घरों में दीये जलाएं। अपने स्वजनों के साथ ईगास उत्साह के साथ मनाएं।
बलूनी की अपील का दिखा असर
उत्तराखंड के पारंपरिक त्योहार ईगास के प्रति प्रदेशवासियों में रुचि जगाने और उन्हें प्रेरित करने के लिए बलूनी पिछले कुछ सालों से लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनका यह प्रयास रंग ला रहा है। राजनीति से जुड़े लोग अब धीरे-धीरे अपने गांवों में ईगास मनाने को लेकर प्रेरित हो रहे हैं।
नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट 25 नवंबर को अपने पैतृक गांव जाएंगे। उन्होंने कहा कि गांव में ईगास मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। इस कार्यक्रम के जरिये उनका यह संदेश है कि देश विदेश में निवास कर रहे उत्तराखंड के प्रवासी अपनी विरासत और परंपरा के संरक्षण के लिए आगे आएं। 25 नवंबर को ईगास अपने गांव में मनाने का संकल्प लें। बकौल भट्ट, लोक परंपराओं और संस्कृति को बचाने के लिए हम सभी को एकजुट होना होगा।