केंद्र सरकार का कहना था कि यह मामला प्रतिनियुक्ति से अलग है लिहाजा इस याचिका को खारिज किया जाए। ऑनलाइन सुनवाई करते हुए अब केट ने संजीव चतुर्वेदी को उत्तराखंड सरकार की ओर से दी गई एनओसी से छेड़छाड़ करने पर रोक लगा दी है। इसका मतलब यह भी हुआ कि संजीव की एनओसी को राज्य सरकार वापस नहीं ले सकती। केट ने कहा है कि मामले का निपटारा न होने तक इस एनओसी को जस का तस रखा जाए।
यह पहली बार नहीं है जब संजीव की एनओसी को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच मामला उलझा है। इससे पहले भी दो बार एनओसी को लेकर खींचतान हो चुुकी है। राज्य सरकार भी एनओसी जारी करने के बाद वापस ले चुकी है। इस बार राज्य सरकार ने तीन साल का कूलिंग समय पूरा होने और संजीव के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला न होने के आधार पर एनओसी जारी की है।
संजीव ने वन अनुसंधान को भी दिलाई पहचान
संजीव के आने से पहले तक वन अनुसंधान संस्थान को पनिशमेंट पोस्टिंग के रूप में भी देखा जाता था, लेकिन तीन साल के कार्यकाल में वन अनुसंधान संस्थान कई मामलों में सुर्खियों में आया।