पटेल नगर क्षेत्र चमनपुरी स्थित सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में बैग में बंद धूल फांक रहे लैपटॉप के
राशन की दुकानों को सीएससी की तरह सुविधाएं देने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई। जिले में 1043 राशन की दुकानों को लैपटॉप, प्रिंटर व डोंगल मुहैया कराए गए थे, तब दावे किए जा रहे थे कि अब अंगूठा लगाकर राशन वितरित किया जाएगा। इससे राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी, लेकिन आलम ये है कि विभाग की ओर से डीलरों को उपलब्ध कराए गए लैपटॉप का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है। कहीं लैपटॉप अलमारियों में रखें धूल फांक रहे हैं तो कहीं डीलर ने खराब होने का हवाला देखकर उन्हें बच्चों को खेलने के दिए दे रखा है। अमर उजाला टीम ने सस्ते गल्ले की दुकानों पर बनाए गए सीएससी का जायजा लिया तो हकीकत सामने आई।
डाटा कम मिल रहा
राशन डीलरों को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) चलाने के लिए 2018 में लैपटॉप, प्रिंटर व डोंगल उपलब्ध करा दिए गए लेकिन इसके लिए पर्याप्त इंटरनेट की व्यवस्था नहीं की गई। राशन डीलरों का कहना है विभाग की ओर से दिया जाने वाला डाटा बहुत ही कम समय में खत्म हो जाता है, जिसके बाद काम रुक जाता है। कई बार इसकी शिकायत भी की गई लेकिन अधिकारियों ने नहीं सुनी।
केस-1 : चमनपुरी (निरंजनपुर) स्थित ओमप्रकाश की सस्ते गल्ले की दुकान पर लैपटॉप नहीं दिखने पर जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि लैपटॉप अलमारी में रखा है। कारण बताया कि उन्हें वह चलाना नहीं आता। हालांकि इसके लिए ट्रेनिंग भी ली थी लेकिन उन्हें कुछ समझ नहीं आया। लैपटॉप खराब न हो जाए, इस डर से अलमारी में संभाल कर रखा हुआ है।
केस-2
चुक्खू मोहल्ला में राशन डीलर हेमंत अग्रवाल ने बताया कि लैपटॉप खराब होने कारण घर में रखवा दिया है। विभाग की ओर से खराब लैपटॉप की मुहैया कराए गए जो ज्यादा समय तक नहीं चल सके। विभाग गेहूं व चावल के कमीशन से तो 16 रुपये की कटौती कर रहा है लेकिन पांच बार शिकायत करने पर भी लैपटॉप ठीक नहीं किया गया।
केस-3
ब्रह्मपुरी में सस्ते गल्ले की दुकान के संचालक राकेश ने बताया कि उन्हें लैपटॉप चलाना नहीं आता। ऐसे में इस लैपटॉप में कुछ खराबी आ गई तो उसका भुगतान कौन करेगा। इसलिए एसे घर में रखा है। बेटा थोड़ा बहुत चला लेता है। उसके काम आ जाता है।
कोट::
अगर राशन की दुकानों पर लैपटॉप व अन्य मशीनों की इस प्रकार दुर्दशा हो रही है। तो इसकी जांच की जाएगी। इसके अलावा जल्द डीलरों को इंटरनेट की व्यवस्था कराई जाएगी। योजना में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं।
- पीएस पांगती, संयुक्त आयुक्त/नोडल अधिकारी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति